बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

ध​र्म और राजनीति का कॉकटेल

सोनी सोरी पर रिसर्च करने गए शोध छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया. क्या रिसर्च करना अपराध है या सोनी सोरी होना अपराध है?
14 अक्तूबर से शुरू होने वाले उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल शुरू होने से ठीक एक दिन पहले की शाम उसे रुकवाने की कोशिश की गई. बताया गया है कि यह संघ के दबाव में रुकवाया गया. बाद में आयोजन स्थल बदल कर आयोजन किया गया. इससे संघ को या सरकार को क्या खतरा था?
इंदौर में इप्टा की नेशनल कांफ्रेंस में भी गुंडों द्वारा व्यवधान पैदा किया गया. इसमें भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय की संलिप्तता बताई गई. इप्टा जैसे साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों से किसको खतरा है?
वृंदावन में कुछ नास्तिक ​मित्र मिलकर एक सम्मलेन करना चाह रहे थे. इसमें अखिलेश प्रशासन की मिलीभगत से साम्प्रदायिक गुंडों ने बवाल किया. नास्तिक दर्शन की परंपराओं वाले देश में नास्तिक और आस्तिकता गुंडे कबसे और क्यों तय करने लगे?
इन सभी कार्यक्रमों में कुछ ऐसा नहीं था जो सरकार विरोधी होता. ये कार्यक्रम किसी के भी विरोध में नहीं थे, लेकिन गुंडागर्दी के साथ उन्हें रोका गया.
स्कूल प्रिंसिपल ने मोदी और आरएसएस के खिलाफ पोस्ट लिख दी तो गिरफ्तार हो गया. दिलीप मंडल पर लखनउ में मुकदमा दर्ज कराया गया है. जेएनयू में मोदी का पुतला जलाया गया तो मनमोहन का पुतला जलाने वाले लोकतांत्रिक आहत हो गए और जांच बैठा दी गई.
क्या भारतीय लोकतंत्र में बहस-मुबाहसा, कला-संस्कृति, लिखने-बोलने आदि अभिव्यक्तियों पर इस कदर पाबंदी है कि सड़कछाप गुंडे तय करेंगे कि कोई कार्यक्रम होने दिया जाए या नहीं? इन सभी राज्यों की पुलिस इन गुंडों के साथ मिलकर कौन सी नजीर पेश कर रही है.
सेना के नाम फैलाए गए उन्माद के बीच आपसे बहुत कुछ छीन लिया जाएगा. सीमा पर सेना 70 साल से पहरा दे रही है. सीमा सुरक्षित है, लेकिन घर के अंदर शैतानों का कब्जा हो गया है. खतरा सीमा पर आंशिक है, सीमा के भीतर ज्यादा है. आपके लोकतांत्रिक अधिकार गुंडों को सौंपे जा रहे हैं.
धर्म और राजनीति का कॉकटेल बनाकर अनपढ़ गुंडों को पिलाते रहने से एक तालिबान की नींव पड़ती है. चूंकि भक्तों के गिरोह की सारी प्रतियोगिता पाकिस्तान से है, इसलिए शहर-दर-दर यह प्रक्रिया तेज हो रही है. गोडसे की मूर्ति की स्थापना गांधी के देश में हत्यारों के खुले घूमने का प्रमाणपत्र है.
महान देशभक्त भाजपा और आरएसएस ने 90 सालों में यह सीख लिया है कि लोगों को बेवकूफ कैसे बनाना है. लगातार धर्म और मातृभूमि जैसे संवेदनशील मसलों को मुद्दा बनाकर लोगों को उलझाए रखना है. उसके बाद तालिबान की तैयारी में कोई व्यवधान नहीं आने वाला.
सोनी सोरी पर रिसर्च करने गए छात्र की गिरफ्तारी, उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल को रुकवाने की कोशिश, इंदौर में इप्टा की कांफ्रेंस में गुंडों का उपद्रव, वृंदावन में कुछ नास्तिकों के सम्मेलन में गुंडागर्दी, इन सभी अराजकताओं को सरकारों का समर्थन, मोदी और आरएसएस के खिलाफ पोस्ट लिखने पर स्कूल प्रिंसिपल की गिरफ्तारी, दिलीप मंडल पर मुकदमा, जेएनयू में मोदी का पुतला जलाने पर जांच बैठा देना, पुलिस प्रशासन का चुपचाप सब देखते रहना क्या है, यह कोई भी समझ सकता है. यह सब साबित करता है कि सरकार उस हर चीज को हतोत्साहित करना चाहती है जो लोकतांत्रिक है.
लोकतंत्र में बहस-मुबाहसा, कला-संस्कृति-साहित्य आदि अभिव्यक्तियों पर पाबंदी लोकतंत्र की हत्या की मुनादी है. भक्तों को पाकिस्तान बहुत पसंद है, वे तेजी से उसी ओर बढ़ रहे हैं.
आप चाहें तो उत्तर प्रदेश में सेना के नाम बिछी चुनावी बिसात पर बिछ सकते हैं. लेकिन अभिव्यक्ति का अधिकार खो देने के बाद जब तक आप समझेंगे कि आपने क्या खोया है, तब तक आपका दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र पाकिस्तान बन चुका होगा.

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