रविवार, 28 अगस्त 2016

धर्म और राजनीति का नाजायज रिश्ता

एक बहुत बड़े नेता जी और एक साधु बाबा में वार्ता हो रही थी. मुद्दा था कि हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति पर खतरे से कैसे निपटा जाए.
बाबा बोले- 'बच्चा! तुम लोग देश को संस्कार और धर्म के रास्ते से भटका रहे हो.'
नेता जी कुटिल मुस्की मारते हुए बोले- 'नहीं बाबा जी, आपको कोई भरम हो गया है. हम देश बचाने के साथ देश की संस्कृति और धर्म सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम गोरक्षा कर रहे हैं. गाय माता के अंदर 33 करोड़ देवता हैं, गाय में धर्म है इसलिए हम धर्मरक्षा कर रहे हैं. धर्म की रक्षा के लिए पैसा चाहिए, इसलिए हम बूचड़खाना चला रहे हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा मांस सप्लाई का हमारा रिकॉर्ड बन चुका है.'
बाबा ने खुश होते हुए अपनी भगवा झोली से चिलम निकाली और उंगली डालकर उसे साफ करने लगे. नेता जी ने आगे कहा- 'देखिए, हम संतुलन बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं. हमारे नेता जी एक तरफ विकास का नारा लगवाते हैं, दूसरी तरफ हम गाय माता को बचाने के लिए दंगा करवा देते हैं. जनता में कोई गलत संदेश न जाए, इसलिए नेता जी से निंदा भी करवा देते हैं. देखिए अभी अभी उन्होंने बोला था कि 80 प्रतिशत गोरक्षक लोग लंपट है.'
'न न न न बच्चा... यहीं तो गड़बड़ हो गई.' बाबा ने अल्पविराम लिया, भगवा झोले की बगल वाली जेब से गांजा निकाला, निस्पृह भाव से चिलम के मुख-मंडल पर रखा और नेता जी को माचिस पकड़ा दी. नेता जी ने इशारा समझा और मुस्कराते हुए आग जलाई. बाबा के मुखारविंद से बम भोले की आवाज गूंजी और अगल-बगल सब धुआं-धुआं हो गया.
बाबा ने भट्ठे की चिमनी की तरह भभका छोड़ा और सांस खींच कर बोले- 'देखो बच्चा, जैसे आपने अभी मुस्कान के साथ चिलम में आग दी, बिना विचलित हुए, बिना धैर्य खोए, और परिणाम देखो. चिलम पूरी तरह अग्नि से भर गई. अब मैं इसे फूंक कर राख कर दूंगा. तुमको धर्म की रक्षा भी ऐसे ही करनी है. तुम्हारे नेता जी के भाषण में त्रुटि थी. गोरक्षकों को उकसाकर दो साल में सड़क पर लाया गया. यह तो सकारात्मक है, लेकिन उनको गुंडा और लंपट बता देने पर नब्बे साल के सपने पर पानी फिर गया. यह धर्मविरोधी तत्वों की जीत है.'
बाबा ने थोड़ा विराम लिया. पुन: चिलम मुखारविंद तक लाए, एक लंबा सुड़ुुक्का भरकर छोड़ा तो नेता जी और बाबा के बीच की दृश्यता कुछ देर के लिए शून्य हो गई. बाबा ने फिर से कहना शुरू किया- 'बच्चा, धर्म धैर्य की मांग करता है. धार्मिक का धैर्य खो देना धर्म के मार्ग से स्खलित हो जाना है. स्खलन पुरुष को पौरुष मार्ग से विचलित करता है. धर्म की सुरक्षा तब होगी जब पूरे मनोयोग से आग लगाई जाए और कितनी भी चीख पुकार मचे, उफ तक न किया जाए. उस आग में अपना हाथ सेंक रहे श्रद्धालुओं को सुरक्षा दी जाए. उनपर किसी तरह का हमला न किया जाए. तब जाकर धर्म की रक्षा हो सकेगी. अन्यथा धर्म का सत्यानाश समझना चाहिए. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है.'
नेता जी ने उलूक की तरह अपना खल्वाट हिलाकर हामी भरी, आगे तक निकल आए पेट पर हाथ फेरा और डकार लेते हुए बोले- 'जी गुरुदेव... लेकिन बयान नहीं देने से विपक्ष हंगामा करता है. अमेरिका वाला राक्षस लोग सब आलेख छापकर निंदा कर देता है. वाशिंग मशीन नामक एक समाचार पत्र ने लिख डाला कि ई सब विश्वगुरु लोग तालिबान बन गया है. गुरुदेव हम लोगों का अंतर्राष्ट्रीय निंदा होने लगता है.'
बाबा ने चिलम का अंतिम कश खींचकर छोड़ा, धुआं इस बार और घना था. धुआं छंट जाने के बाद बोले- देखो, जैसे हम अपनी बात कहने के लिए इस चिलम से निकले धुएं के छंटने का इंतजार करते हैं, उसी तरह धैर्यपूर्वक आग लगाने के बाद मौन साध लेना चाहिए और धुआं छंटने का इंतजार करना चाहिए... याद रखो बच्चा, धर्म पति है और राजनीति पत्नी है. धर्म के द्वारा राजनीति पर अंकुश लगाना चाहिए. जिस तरह से पत्नी पर अंकुश रहे तो घर में शांति आती है, उसी तरह राजनीति पर धर्म के अंकुश से चराचर जगत में शांति आएगी...
बात पूरी होती, इसके पहले ही झाड़ियों से धूल झाड़ते हुए धर्मांधाधिराज, समस्त भक्त समुदाय के बापू श्री आसाराम प्रकट हुए. बाबा और नेता अवाक उनकी तरफ देखने लगे.
आसाराम ने छूटते ही कहा, 'राजन! यह पति-पत्नी वाला प्रसंग तो मैं पहले ही सिद्ध कर चुका हूं. मैंने दिखाया था कि धर्म, सत्ता और पैसे का नशा कैसे राजनीति और जनता को काबू में रखता है! मैंने यह भी साबित किया कि धर्मरूपी पति द्वारा तमाम पतियों की पत्नियों को पतनशील मार्ग दिखाकर खुद को पतितपावन बनाए रखा जा सकता है. परमपिता का नाम ले-लेकर पुरुषों को पशु और पत्नियों को पपेट बनाया जा सकता है. लेकिन सत्यानाश हो राजनीति का, ये कांग्रेस वाला सब नेता लोग हमको जेल में डलवा दिया. और ये आरएसएस वाला नेता लोग सब दूसरा धर्मपति खोज लाया, वह भी नंगा. यह हमारे विराट हिंदुत्व की हार है...'
आसाराम जी यही इतना बोल पाए थे कि वे भावुक हो गए और गला ऐसे रुंध गया जैसे मोहल्ले की कोई गली गोरक्षक-दंगाइयों से भर जाती है. बाबा और नेताजी दोनों भावुक हो गए और नेताजी अपने मोबाइल में सुब्रमण्यम स्वामी का नंबर खोजने लगे.

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