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August, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म और राजनीति का नाजायज रिश्ता

एक बहुत बड़े नेता जी और एक साधु बाबा में वार्ता हो रही थी. मुद्दा था कि हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति पर खतरे से कैसे निपटा जाए.
बाबा बोले- 'बच्चा! तुम लोग देश को संस्कार और धर्म के रास्ते से भटका रहे हो.'
नेता जी कुटिल मुस्की मारते हुए बोले- 'नहीं बाबा जी, आपको कोई भरम हो गया है. हम देश बचाने के साथ देश की संस्कृति और धर्म सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम गोरक्षा कर रहे हैं. गाय माता के अंदर 33 करोड़ देवता हैं, गाय में धर्म है इसलिए हम धर्मरक्षा कर रहे हैं. धर्म की रक्षा के लिए पैसा चाहिए, इसलिए हम बूचड़खाना चला रहे हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा मांस सप्लाई का हमारा रिकॉर्ड बन चुका है.'
बाबा ने खुश होते हुए अपनी भगवा झोली से चिलम निकाली और उंगली डालकर उसे साफ करने लगे. नेता जी ने आगे कहा- 'देखिए, हम संतुलन बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं. हमारे नेता जी एक तरफ विकास का नारा लगवाते हैं, दूसरी तरफ हम गाय माता को बचाने के लिए दंगा करवा देते हैं. जनता में कोई गलत संदेश न जाए, इसलिए नेता जी से निंदा भी करवा देते हैं. देखिए अभी अभी उन्होंने बोला था कि 80 प्रतिशत गोरक्षक लोग …

एक गोभक्त से भेंट- हरिशंकर परसाई

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एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए. ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे. चेहरा लाल. गेरुए रेशमी
कपड़े पहने थे. पांवों में खड़ाऊं. हाथ में सुनहरी मूठ की छड़ी. साथ एक छोटे साइज का किशोर संन्यासी था. उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को रफी के गाने के सुनवा रहा था.

मैंने पूछा- स्वामी जी, कहां जाना हो रहा है?

स्वामीजी बोले – दिल्ली जा रहे हैं, बच्चा!
मैंने कहा- स्वामीजी, मेरी काफी उम्र है, आप मुझे ‘बच्चा’ क्यों कहते हैं?

स्वामीजी हंसे. बोले – बच्चा, तुम संसारी लोग होटल में साठ साल के बूढ़े बैरे को ‘छोकरा’ कहते हो न! उसी तरह हम तुम संसारियों को बच्चा कहते हैं. यह विश्व एक विशाल भोजनालय है जिसमें हम खाने वाले हैं और तुम परोसने वाले हो. इसीलिए हम तुम्हें बच्चा कहते हैं. बुरा मत मानो. संबोधन मात्र है.

स्वामीजी बात से दिलचस्प लगे. मैं उनके पास बैठ गया. वे भी बेंच पर पालथी मारकर बैठ गए. सेवक को गाना बंद करने के लिए कहा.

कहने लगे- बच्चा, धर्मयुद्ध छिड़ गया. गोरक्षा-आंदोलन तीव्र हो गया है. दिल्ली में संसद के सामने सत्याग्रह करेंगे.

मैंने कहा- स्वामीजी, यह आंदोलन किस हेतु चलाया जा रहा…

क्या समान नागरिक संहिता के लिए देश तैयार है?

संविधान सभा में काफी विचार-विमर्श के बाद संविधान के नीति निदेशक तत्वों में यह प्रावधान किया गया था कि राज्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लाने का प्रयास करेगा. समान नागरिक संहिता का मुद्दा हमेशा चर्चा में तो खूब रहा, चुनावी घोषणा पत्रों में भी शामिल हुआ, लेकिन इसका अब तक कोई प्रारूप तक मौजूद नहीं है. अब नरेंद्र मोदी सरकार ने इस विषय पर लॉ कमीशन से रिपोर्ट सौंपने को कहा है, लेकिन क्या समान नागरिक संहिता के लिए देश तैयार है?



हाल ही में केंद्र सरकार ने विधि आयोग को पत्र लिखकर समान नागरिक संहिता (यूनीफाॅर्म/कॉमन सिविल कोड) यानी सभी के लिए एक जैसे कानून पर सुझाव मांगा है. अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा था. इसके बाद सरकार ने पहली बार विधि आयोग को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर रिपोर्ट देने को कहा था. कुछ दिन पहले सरकार ने विधि आयोग को दोबारा पत्र लिखकर इस मसले की याद दिलाई जिसके बाद यह मसला चर्चा में है. भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री का पद संभालने के बाद कहा, ‘समान नागरिक संहिता की दिशा में क…

गाय, गोबर और गोमूत्र विज्ञान

चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुताबिक, सारी दुनिया का ज्ञान वेदों निकला है. और समस्या का समाधान गोबर और गोमूत्र में है. इसलिए हमने गोबर और गौमूत्र पर शोध शुरू किया है.

पहला ज्ञान:

दुनिया का पहला एक कोशिकीय जीव विराट हिंदू था और वह गाय के गोबर से अवतरित हुआ. यहीं से गोबरवाद की नींव पड़ी. अब पहला एक कोशिकीय जीव बनने से पहले गाय कहां से आई, यह सवाल पूछना गोबर के अवतरण पर सवाल है. इसे गोबरनिंदा कहा जाएगा जो ईशनिंदा के बराबर वाली कुरसी पर बैठा है. सवाल उठाने वाला देशद्रोही माना जाएगा. गोबर महात्म्य पर सवाल करना देशद्रोह है.
गोबर महिमा विशुद्ध आस्था का मामला है. देश और देवता दोनों ही गोबरवादियों के लिए आस्था के मामले हैं, क्योंकि दोनों ही मूर्खता की कंचनजंघा पर विराजमान हैं.
तो भइया हुआ ये कि पहले जीव के धरती पर अवतरित होने के साथ ही भारतवर्ष में गोबर विज्ञान की भी शुरुआत हुई. दुनिया का विकास कैसे हुआ इसका राज गोबर में छुपा है. डारबिनवा ने जो कहानी रची है, वह सब फर्जी है. गोबर से प्रत्येक जीव-जंतु और संपूर्ण चराचर जगत की व्युत्पत्ति हुई है. गोबर में मौजूद स्थूल तरंगों से भौतिक संसार का …