बुधवार, 23 मार्च 2016

आचार्य रामपलट दास: जोगीरा सा रा रा रा

आचार्य रामपलट दास जी फागुन लगते ही फगुआ जाते हैं और लगभग पूरे फागुन कमाल करते हैं. होली नियराते ही इस बार भी वे फगुआ गए हैं और उनकी फेसबुक वॉल जोगीरा से भरी है. उनकी इन दो—दो पंक्तिओं की कविता में बहुत ताकतवर ढंग से तंज किया जाता है. कविता की यह ताकत बहुत विद्वतापूर्ण कविताओं में नदारद रहती है. उनकी वॉल से टीपकर यहां पर कुछ पंक्तियां आपसे साझा कर रहा हूं. 


कै रुपया में भइंस बिकाए, कै रुपया में गाय
कै रुपया थैली में लेके, बिका विधायक जाय जोगीरा सा रा रा रा
एक लाख में भैंस बिकाए, हज्जारों में गाय
पांच करोड़ी थैली खातिर, बिका विधायक जाय जोगीरा सा रा रा रा
भइंस बिकाई दानापुर में, बछिया गंगापार
देवभूमि में बिके विधायक, चित्त पड़ी सरकार जोगीरा सा रा रा रा
नारा सुनके जेल दिखावे , लेख लिखे पर रार
मौन सभा पर लाठी भाँजे, डरी हुई सरकार जोगीरा सा रा रा रा
कौन मिठाई चमचम चमके, कौन बिके बाज़ार
कौन मिठाई माछी भिनके , नाम केकर सरकार जोगीरा सा रा रा रा रा
संघ मिठाई चमचम चमके, राष्ट्र बिके बाज़ार
तर्क मिठाई माछी भिनके, हाफ़ पैन्ट सरकार जोगीरा सा रा रा रा रा
उचक उचक कर भौंचक देखें, पल्टू लम्बरदार
मोम के पुतले जैसा दिक्खे , ईश्वर का उपहार जोगीरा सा रा रा रा
पेट नपा छाती नपी नप गए नाक और कान
अमर भए की चाह में नपे पन्त परधान जोगीरा सा रा रा रा
मीरपूर में मीर कहाए, ढाका अफ़लातून
नागपूर में नानी मर गी, उतर गयी पतलून जोगीरा सा रा रा
एक कुआं में चार कबुत्तर, चारों मांगे नून
निक्कर की इनटॉलरेन्स को, ढंकी रखे पतलून जोगीरा सा रा रा रा
दुनिया बदली देश बदल ग्या, बदले कइ कानून
देखा-देखी बदल रही है , निक्कर से पतलून जोगीरा सा रा रा रा
बाबा मांगे मुंह बा बा के , चेला दांत चियार
श्री श्री मांगे नाच नाच के, झुकी खड़ी सरकार जोगीरा सा रा रा रा रा
पूँछ पटक कर कुक्कुर खाए, चाट-चाट बिल्लार
सफाचट्ट कर माल्या खाया, खोज रही सरकार जोगीरा सा रा रा रा
स्वर्ग बिक चुका मोक्ष बिक चुका बिका अध्यात्म का अंजन
श्री श्री बेचें तेल केश का रामदेव जी मंजन जोगीरा सा रा रा रा
कौने खेत में गोहूँ उपजे, कवन खेत में धान
कौन खेत में लड़े लड़ाई , के होला बलिदान जोगीरा सा रा रा रा
दोमट खेत में गोहूँ उपजे, मटियारे में धान
लोन चुकावत सब कुछ हारे, जाए कहाँ किसान जोगीरा सा रा रा रा
केकर बाटे कोठी कटरा , के सींचेला लान
के नुक्कड़ पर रोज बिकाला, केकर सस्ती जान जोगीरा सा रा रा रा
नेताजी क कोठी कटरा, अफ़सर सींचें लॉन
हर नुक्कड़ मजदूर बिकाला, फाँसी चढ़े किसान जोगीरा सा रा रा रा
मूस मोटाई लोढ़ा होई , काटी सबकर कान
घाटी वाली गद्दी ख़ातिर , घुसुर गइल सब ग्यान ... जोगीरा सा रा रा रा
कवन डाल से उड़ल चिरइया, कवन डाल पर जाय
कवन डाल से दाना चुन के , कवन राग में गाय ... जोगीरा सा रा रा रा
संघ भवन से उड़ल चिरइया , मठ-महन्थ पर जाय
अम्बनियन से चन्दा ले के , राष्ट्र राष्ट्र चिल्लाय ... जोगीरा सा रा रा रा

2 टिप्‍पणियां:

Deepak Chaubey ने कहा…

ई तो मस्त है , होली मुबारक

Deepak Chaubey ने कहा…

ई तो मस्त है , होली मुबारक