शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' चुनावी जुमला था

नरेंद्र मोदी ने 2014 में भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त संसद देने का वादा किया था. वे ऐसा कर तो नहीं सके लेकिन घोटालों की फेहरिश्त में एक नया घोटाला जुड़ गया. आरोप है कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी की मंत्री आनंदी बेन ने अपनी बेटी को 250 एकड़ कीमती जमीन कौड़ियों के भाव में दिलवाई. 125 करोड़ की जमीन मात्र डेढ़ करोड़ में. अब आनंदी बेन मुख्यमंत्री हैं. हाल ही में यह भी आरोप लगा था कि आनंदी बेन पटेल की बेटी अनार पटेल और बेटे संजय पटेल राज्य में समानांतर सरकार चला रहे हैं. वे सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं.
इंतजार कीजिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उनके पार्टी अध्यक्ष अमित शाह कह दें​गे कि 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' चुनावी जुमला था. अगर वे नहीं भी कहें तो जिस तरह से लूट मची है और मोदी चुपचाप रोज एक नया नारा लॉन्च कर रहे हैं, साफ समझा जा सकता है कि घोटाले और लूट रोकना उनकी प्राथमिकता में नहीं है. मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे बड़ा घोटाला ये हुआ कि यूपीए सरकार ​के जो ​कथित महाघोटाले थे, उनके संबंध न कोई जेल गया, न किसी की संपत्ति जब्त हुई, न किसी को कोई जुर्माना हुआ. कोयला घोटाला, टूजी, कॉमनवेल्थ आदि घोटालों का सच क्या है, यह अब अतीत की बात हो गई. मोदी के नारों में जो कुछ था वह नारों की फेहरिश्त में बहुत पीछे छूट चुका है.
भाजपा घोटालों के मामले में कांग्रेस से बिल्कुल पीछे नहीं है. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद राज्यों में भाजपा की सरकारों ने लूट मचा रखी है. मध्य प्रदेश का व्यापमं घोटाला अब तक का सबसे भयानक घोटाला है. इसमें कितना पैसा खाया गया है यह तो पता ही नहीं है, उस पर 50 के करीब हत्याएं भी हुई हैं. लेकिन राज्य में शिवराज सरकार और केंद्र में मोदी की सरकार आराम से चल रही है. इसी के साथ डीमैट घोटाला भी हुआ है जो दस हजार करोड़ तक अनुमानित है.
हाल ही में राजस्थान में 45 हजार करोड़ का खनन घोटाला हुआ. छत्तीसगढ़ में 36 हजार करोड़ का चावल घोटाला हुआ. महाराष्ट्र के महिला और बाल विकास मंत्रालय में 206 करोड़ का चिक्की घोटाला हुआ, जिसमें मुख्य आरोपी पंकजा मुंडे हैं. महाराष्ट्र में ही 191 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ. इसके मुख्य आरोपी शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े हैं. 25 हजार करोड़ का एलईडी घोटाला कम चर्चा में रहा. यह योजना केंद्र सरकार की है.
इन घोटालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जो कुछ हो रहा है उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस का शासन करने का जो तरीका था, वह समय के साथ विस्तार पा गया है. कुर्सी पर बैठने वाले चेहरे बदल गए हैं, बाकी कुछ नहीं बदला है.
अब आप कहेंगे कि फिर भी कांग्रेस से भाजपा अच्छी है, क्योंकि कांग्रेस में परिवारवाद है. तो यह समझने की आवश्यकता है कि कांग्रेस 125 साल पुरानी पार्टी है, उसकी पीढ़ियां कांग्रेसी रोजगार में खप गईं इसलिए वहां पर परिवार ज्यादा दिखता है. भाजपा 25 साल पुरानी है, भाजपा नेताओं के बच्चे अब बड़े हो रहे हैं और वह सब कर रहे हैं जो कांग्रेस नेताओं के बच्चे कर रहे हैं.
जो लोग कहते हैं कि कांग्रेस में परिवारवाद है और भाजपा में नहीं हैं उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि अब भाजपा परिवारवाद में बाकी दलों को पीछे छोड़ती ऩजर आ रही है. मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी उसी कांग्रेसी परिवारवाद से निकले हैं, जिससे कांग्रेस के राहुल गांधी निकले हैं. यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा, कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह, राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, विजयाराजे सिंधिया की बेटियां वसुंधरा और यशोधरा, वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत, रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह, प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर, मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हैं.
कांग्रेसी नेता भगवत झा आज़ाद के पुत्र कीर्ति आज़ाद भाजपा में ही हैं. लालू के बेटे तेजस्वी यादव की तरह वे भी क्रिकेटर से नेता बने. भाजपा के दिवंगत नेताओं के पुत्र-पुत्रियों को भी उनके रहते या बाद में राजनीति में उतारा गया है. मध्य प्रदेश में दिलीप सिंह भूरिया की पु​त्री निर्मला भूरिया, महाराष्ट्र में दिवंगत प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन, गोपीनाथ मुण्डे की पुत्रियां पंकजा मुण्डे और प्रीतम मुंडे को सक्रिय राजनीति में भागीदारी और पद मिले हैं. दिल्ली में साहिब सिंह वर्मा के सुपुत्र प्रवेश वर्मा भी सांसद हैं. भाजपा की ओर से दिवंगत नेताओं की पत्नियों को भी बिना किसी राजनीतिक अनुभव या योग्यता के चुनाव लड़ाया जा रहा है. सरदार सदाशिव राव महादिक की ​बेटी गायत्री राजे महादिक, जो दिवंगत तुकोजीराव की पत्नी हैं, इसका ताजा उदाहरण है.
जो नरेंद्र मोदी देश भर में घूम घूम कर परिवारवाद को नेस्तनाबूद करने का नारा लगा रहे हैं, उनके मॉडल स्टेट गुजरात में मुख्यमंत्री के बच्चे समानांतर सरकार चला रहे हैं और जमीनें हथिया रहे हैं.
आप पूछेंगे कि फिर किसे चुनें? हम कहेंगे कि चाहे जिसे चुनें, लेकिन जिसे चुनें उससे सवाल पूछें. नरेंद्र मोदी की छाती पर चढ़कर पूछें कि यह देश सवा अरब भारतीयों का है और तुम इसके चौकीदार हो. जनता की संपत्ति कोई कैसे उठा ले जाता है, इसका जवाब दो. सरकारें चुनिए और जवाब मांगिए, वरना हमारे हाथ घोटाले गिनने के अलावा कुछ नहीं आएगा. 

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