रविवार, 27 दिसंबर 2015

किसान आत्महत्याएं और तेलंगाना का शाही यज्ञ

तेलंगाना में सरकार शाही यज्ञ करा रही है. वही ​तेलंगाना जो करीब आधी सदी तक संघर्ष के बाद नया राज्य बना है. वही तेलंगाना जहां इसी साल करीब एक हजार किसानों ने आत्महत्या की है. अभी का आंकड़ा नौ सौ के आसपास है. 2015 के आधिकारिक आंकड़े जारी होंगे. किसानों की लाशें इस देश में आंकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं हैं. जैसे राज्य सरकार का यज्ञ आयोजन एक खबर से ज्यादा कुछ नहीं है.
रविवार को खबर आई कि तेलंगाना में चल रहे इस शाही के यज्ञ के पंडाल में आग लग गई. यह पंडाल 7 करोड़ रुपये की लागत से बना था. सच कहूं, इस खबर से मुझे खुशी हुई. किसानों की लाशों पर होने वाले सरकारी यज्ञ में आग ही लगनी चाहिए. इन सरकारों के पास घास की रोटियां खा रहे किसानों के लिए कुछ नहीं हैं. रोटी की जगह फिनायल पीकर मरने वाले किसानों के लिए कुछ नहीं है. लेकिन सरकारी यज्ञ कराने के लिए खजाने लुटा रहे हैं. मात्र एक पंडाल पर जितना पैसा खर्च किया गया, उतने में इस साल करीब 1000 किसानों की आत्‍महत्‍या रोकी जा सकती थी.
जिन किसानों की मौत को सरकारी आंकड़ों में आत्महत्या कहा जाता है, वे दरअसल आत्‍महत्याएं नहीं, सरकारी हत्याएं हैं. जनता के हिस्से का धन हवन हो जाता है और जनता भूख से मरती है.
यह वही तेलंगाना राज्‍य है जिसके लिए लंबा संघर्ष चला और सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई. अंतत: 2 जून, 2014 को इस 29वें राज्य का गठन हुआ. आजादी के पहले तक तेलंगाना  हैदराबाद निजाम का हिस्‍सा था. बाद में इसे 1956 में नवगठित आंध्र प्रदेश में मिला दिया गया. तेलंगाना क्षेत्र में आजादी के पहले से असंतोष था, क्योंकि यह क्षेत्र पिछड़ा था और यहां के लोगों को लगता था कि उन्हें सत्ता में उचित भागीदारी और विकास के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं. 1940 के दशक से ही वामपंथी नेता कॉमरेड वासुपुन्यया के नेतृत्व में वामपंथी धड़ा अलग तेलंगाना राज्य की मांग कर रहा था. तेलंगाना क्षेत्र को आंध्र में मिलाए जाने के बाद यहां के छात्रों ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया और अलग राज्य की मांग जोर पकड़ गई. 1969 में इस आंदोलन ने हिंसक रूप धारण कर लिया. उस्मानिया विश्वविद्यालय इस आंदोलन का केंद्र बना.
6 अप्रैल, 1969 को तेलंगाना के समर्थन में उस्मानिया के सैकड़ों छात्रों ने मिलकर तेलंगाना के विरोध में बुलाई गई एक मीटिंग का घेराव किया. यह मीटिंग आंध्र प्रदेश के तेलंगाना विरोधियों ने बुलाई थी. छात्रों की जबरदस्त भीड़ पर पुलिस ने फायरिंग कर दी जिसमें तीन छात्र मारे गए. एक मई को एक बार फिर छात्रों ने तेलंगाना क्षेत्र के लोगों के समर्थन से एक बड़ी रैली निकाली. रैली पर रोक लगाने के बावजूद हजारों की भीड़ जमा हो गई. इस रैली में भी पुलिस फायरिंग हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. 1969 के पूरे तेलंगाना आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से 369 लोगों की जान गई थी. मारे गए लोगों में ज्यादातर उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र थे.
हालांकि, बाद में एम. चेन्नारेड्डी की अगुआई वाली तेलंगाना प्रजा समिति का कांग्रेस में विलय हो गया और फिर यह आंदोलन शांत हो गया. 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने तीन नए राज्यों का गठन किया-उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़. इसके बाद तेलंगाना की मांग फिर से उठी. 2001 में के. चंद्रशेखर राव अलग तेलंगाना का मुद्दा उठाते हुए तेलुगू देशम पार्टी से अलग हुए और तेलंगाना राष्ट्र समिति बना ली. 2014 में तेलंगाना अलग राज्य बना.
तेलंगाना संघर्ष की मुख्य वजह थी कि राज्य का अलग ढंग से विकास होगा और गरीबी दूर होगी. लेकिन नया राज्य बनने के बाद सूखा, गरीबी, भुखमरी, आत्महत्याएं वैसे ही जारी हैं. नये राज्य की नई सरकार शाही यज्ञ कराकर जनता के पैसे फूंक रही है. इतने लंबे संघर्ष के बाद गठित राज्य में भी किसानों को आत्महत्या करनी पड़ रही है.
वे कौन से देवी-देवता हैं जो किसानों की कीमत पर हवि और शमिधा से खुश होंगे और मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव को अभयदान देंगे? ऐसी निर्दयी और अधर्मी सत्ता को फिर-फिर आग लगे. 

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