संदेश

December, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

करछना में सरकारी लूट का कहर

चित्र
यह इसी देश में संभव है कि किसान विकास कार्यों के लिए अपनी जमीन दे, अपनी जीविका और सुरक्षा कुर्बान करे और अगर अपने अधिकार मांगने लगे तो लाठी खाए, गोली खाकर जान गंवाए. देश भर में जहां कहीं भी सरकारें जमीन अधिग्रहण करती हैं, वहां जनता से टकराव के बाद पुलिस बल का इस्तेमाल जैसे नियम बन गया है.
इलाहाबाद जिले की करछना तहसील के कचरी गांव में करीब दो महीने से धारा 144 लागू है. पुलिस आैैर ग्रामीणाें में संघर्ष के बाद पूरे गांव में पीएसी तैनात है. गांव के कई घरों में ताले लगेे हैं. गांव सूना  पड़ा है. पुलिस की दहशत से गांव के 70 फीसदी लोग घरों में ताला लगाकर वहां से भाग गए हैं. जो घर खुले हैं, उनमें सिर्फ महिलाएं और बच्चे हैं. कई घरों के दरवाजे टूटे हैं. घरों के अंदर भी तोड़फोड़ की गई है. गांव वालों के मुताबिक इन्हें पुलिस ने तोड़ा है. गांव के सभी पुरुष पुलिस के डर से फरार हैं,  यहां सिर्फ महिलाएं, बच्चे और बूढ़े बचे हैं.


जमीन बचाने के लिए कचरी गांव के किसान 1,850 से ज्यादा दिनों से धरने पर हैं. इसी साल 9 सितंबर की सुबह 7 बजे किसान आंदोलनकारियों पर पुलिस ने धावा बोल दिया. ग्रामाणों और पुलिस के बीच…

किसान आत्महत्याएं और तेलंगाना का शाही यज्ञ

चित्र
तेलंगाना में सरकार शाही यज्ञ करा रही है. वही ​तेलंगाना जो करीब आधी सदी तक संघर्ष के बाद नया राज्य बना है. वही तेलंगाना जहां इसी साल करीब एक हजार किसानों ने आत्महत्या की है. अभी का आंकड़ा नौ सौ के आसपास है. 2015 के आधिकारिक आंकड़े जारी होंगे. किसानों की लाशें इस देश में आंकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं हैं. जैसे राज्य सरकार का यज्ञ आयोजन एक खबर से ज्यादा कुछ नहीं है.
रविवार को खबर आई कि तेलंगाना में चल रहे इस शाही के यज्ञ के पंडाल में आग लग गई. यह पंडाल 7 करोड़ रुपये की लागत से बना था. सच कहूं, इस खबर से मुझे खुशी हुई. किसानों की लाशों पर होने वाले सरकारी यज्ञ में आग ही लगनी चाहिए. इन सरकारों के पास घास की रोटियां खा रहे किसानों के लिए कुछ नहीं हैं. रोटी की जगह फिनायल पीकर मरने वाले किसानों के लिए कुछ नहीं है. लेकिन सरकारी यज्ञ कराने के लिए खजाने लुटा रहे हैं. मात्र एक पंडाल पर जितना पैसा खर्च किया गया, उतने में इस साल करीब 1000 किसानों की आत्‍महत्‍या रोकी जा सकती थी.
जिन किसानों की मौत को सरकारी आंकड़ों में आत्महत्या कहा जाता है, वे दरअसल आत्‍महत्याएं नहीं, सरकारी हत्याएं हैं. जनता के हिस्स…

कांग्रेसी तरीके से बिना जांच की क्लीनचिट

किसी नेता पर गंभीर किस्म के घोटाले में लिप्त होने का आरोप लगने से पहले ही उसे क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है? लेकिन भारतीय लोकतंत्र में यह संसदीय रवायत है कि किसी पर आरोप लगने के साथ ही पार्टी और सरकारें उसे क्लीन चिट दे देती हैं. यह घोटाले से निपटने का कांग्रेसी तरीका है. इसी तर्ज पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डीडीसीए मामले में अरुण जेटली पर लगे सभी आरोपों को बे​बुनियाद बता रहे हैं. मोदी ने संसदीय पार्टी मीटिंग में कहा, 'जेटली पाक साफ हैं. जिस तरह हवाला घोटाले में लालकृष्ण आडवाणी बेदाग साबित हुए, वैसे ही जेटली भी बेदाग होकर बाहर निकलेंगे.' अमित शाह पार्टी के अध्यक्ष हैं. वे अपनी पार्टी लाइन की मजबूरी के चलते कदाचार में शामिल लोगों का भी हर तरह से बचाव करेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अपनी सामूहिक जवाबदेही को ताक पर रखकर बिना किसी जांच पड़ताल के ही जेटली को क्लीन चिट कैसे दे रहे हैं? भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद करीब आठ वर्षों से डीडीसीए में व्याप्त भ्रष्टाचार पर आवाज उठाते रहे हैं. लेकिन उनकी नहीं सुनी गई. अब दिल्ली सचिवालय में छापे के बाद जब…

बुंदेलखंड में अकाल, घास की रोटी खा रहे लोग

चित्र
योगेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में इस वर्ष का सूखा विकराल स्वरुप धारण करता drought effected-जा रहा है। फसलों के नुक्सान, पानी की कमी और रोज़गार के अवसरों की कमी का असर अब सीधे सीधे इंसान और पशुओं के खाने पर दिखाई पड़ने लगा है। इससे यह अंदेशा पैदा होता है कि इस क्षेत्र के सबसे ग़रीब परिवारों के लिए भुखमरी की नौबत आ सकती है। ग़ौरतलब है कि इस क्षेत्र में लगातार तीसरे साल सूखा पड़ रहा है और इस साल ओलावृष्टि/अतिवृष्टि से रवि की फसल भी नष्ट हो गयी थी। इस संकटमय स्थिति का मुकाबला करने के लिए सरकार और प्रसाशन को तुरंत कुछ आपात कदम उठाने होंगे, चूँकि अब तक ये जनता तक राहत पहुंचाने में असमर्थ रहे हैं।
यह निष्कर्ष स्वराज अभियान द्वारा बुंदेलखंड की सभी 27 तहसीलों के 108 गांवों में किये सर्वेक्षण से सामने आया है। इस सर्वे में कुल 1206 परिवारों (सबसे ग़रीब 399 सहित) का इंटरव्यू किया गया। दशहरा और दिवाली के बीच हुए इस सर्वे में स्वराज अभियान और बुंदेलखंड आपदा राहत मंच के कार्यकर्ताओं ने गांव गांव जाकर सूखे के असर का जायज़ा लिया। सर्वे का निर्देशन योगेन्द्र यादव ने संजय सिंह (परमार्थ औरई),…