गुरुवार, 8 अक्तूबर 2015

किस्सा-ए-गोरक्षा उर्फ गाय पर चर्चा

आज सुबह सुबह गोरक्षा दल के एक सिपाही से गाली खाकर अपने एक भूतपूर्व मित्र की याद ताजा हो गई. एक महीने पहले की दुर्घटना है जब मेरा वह मित्र शहीद हो गया था.
हुआ यह कि दिल्ली चुनाव में धुलाई हो जाने के बाद संस्कारवान कुनबा कनफ्यूजनात्म अवस्था को प्राप्त हो गया. राम मंदिर में जो निवेश आडवाणी जी ने किया था, वह अब दुहने के काबिल नहीं बचा था. तो कुनबे को अचानक गाय की याद आ गई. गाय दुधारू जानवर तो है ही, सियासत में भी उसे दुहा जा सकता है, जहां दूध की जगह वोट निकलता है.
तो दिल्ली चुनाव के बाद और बिहार चुनाव के पहले उक्त मित्र भूतपूर्व हो गए, क्योंकि वे गोरक्षा के लिए शहादत को तैयार थे.
उनके शहादत की कहानी भी बड़ी मारू है. ऐसे ही एक दिन उनके गायात्मक भावुक उच्छवास के दौरान उनसे पूछ लिया कि मित्र आपने कभी गाय पाली है? कभी पूजा पतिंगा किया है या ऐसे ही भावुक हुए जा रहे हैं? वे तुनक कर बोले— तुम सब वामपंथी लोग देशद्रोही हो. मैंने कहा, हम वामपंथी कैसे हुए? और हम लोग कौन? मैं तो तुम्हारे साथ हूं और तुमको माइनस कर दिया जाए तो अकेला हूं.
तो बोले— तुम लोग मतलब रवीश कुमार वगैरह! तुम सब देशद्रोही हो. अब देशद्रोहियों का सफाया ही एकमात्र चारा है. मैं चकरायमान हो गया. गाय पर चर्चा के दौरान रवीश कुमार, देशद्रोह और सफाये का प्रवेश अवांछनीय था.
उसने आगे कहा, जो गाय नहीं पालता, वह भी दूध पीता है न! उसी तरह जो गाय नहीं पालता, उसे भी तो गाय की रक्षा करने का हक है! कभी गाय पाली नहीं है तो क्या हुआ, यूट्यूब पर तो देखी है! गाय हमारी माता है. गाय पर देवता रहते हैं.
मैंने माहौल सेंसेटिव देखा तो तुम से आप पर आ गया. मेरा मित्र आहतातुर हो गया था. मामला बढ़ने पर वह हत हो सकता था. इसलिए संभलकर मैंने पूछा— जो यूट्यूब वाली गाय आपकी माता है, वह जानवर है जो लावारिस अवस्था में घूमता पाया जाता है और कूड़ा भी खाता है! आप उसे ऐसे नारकीय हालत में कैसे छोड़ देते हैं? गाय पर देवता रहते हैं तो गाय को रस्सी से छांदकर, डंडे से मारकर दुहते हैं, उसके बच्चे यानी आपके भाई के हिस्से का दूध निकाल लेते हैं, उसे कुपोषित बना देते हैं, बच्चा मर जाता है तो इंजेक्शन लगाकर गाय को दुहते हैं. माता के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार होता है. उस पर वास करने वाले देवता भी लगता है सोमरस पीकर मगन रहते हैं. गाय की पीठ पर पड़ने वाला डंडा उनको भी तो लगता होगा. बेचारे क्रिया की प्रतिक्रया नहीं देते, वरना तीन चार हजार कपूतों को तो यूं ही निपटा देते.
दोस्त उखड़ गया. तुम लोग मुसलमानों के कोठे के दलाल हो. मुसलमान गाय खाता है. मुसलमान देशद्रोही है. तुम लोग उनका साथ देते हो. तुम लोग भी देशद्रोही हो. धर्म के नाम पर कलंक हो. मुसलमान आतंकवादी होता है. उसे सबक सिखाना होगा. जो गाय मारता है, उसको काट दिया जाएगा.
मेरी घिग्घी, जहां कहीं होती होगी, वहीं बंध गई. मैंने धीरे से पूछा— मेरे भाई, लेकिन जीव हत्या भी तो पाप है! और गाय पर रहने वाला देवताओं ने आपको कमांडो नियुक्त किया है क्या कि मेरी और गो माता की रक्षा करो? हमारा धरम कहता है कि ईश्वर की मर्जी से पत्ता भी नहीं हिलता. हो सकता है कि ईश्वर की मर्जी हो कि मुसलमान गोमांस खाता हो. उसको उसके कर्म का फल मिलेगा...
वह गुस्से में एकदम तपतपायमान अवस्था में पहुंच गया था, कांपते हुए वह बोला— एक मुल्ले ने अपनी बेटी को दुपट्टा नहीं लेने के लिए मार डाला. आईएसआईएस वाले सबको मार रहे हैं. हिंदुओं पर खतरा है...
उसके बात बदलने से मुझे लगा कि कुछ बात बनेगी. मैंने कहा, मेरे दोस्त, आईएसआईएस वाले मुसलमानों का ही रक्तपान कर रहे हैं, वह भी अरब में, तो हिंदुओं पर खतरा कैसे हो गया? और आप किसी इंसान को मारेंगे तो पाप लगेगा. फिर यमराज आपको ले जाएगा और खौलते तेल से भरे कड़ाहे में आपका पकौड़ा तल देगा. यार तुम तो समझदार आदमी हो. इहलोक को नरक बनाने से परलोक का कैसा संबंध है?
वह फुफकारीय अवस्था में फेचकुर छोड़ते हुए बोला— तुम पक्के वामपंथी हो, तुम देशद्रोही हो. तुम सबकी आत्मा रूस में बसती है. तुम सब भारत के लिए खतरा हो...
इस छोटी सी गाय पर चर्चा में रवीश, देशद्रोह, सफाये के बाद यूट्यूब, देवता, मुसलमान, आईएसआईएस, वामपंथ और रूस के अनधिकृत प्रवेश से मैं सनाका खा गया. सारे तर्क तेल लेने चले गए और मैं अपने घर चला गया.
इस तरह मेरा एक अभूतपूर्व मित्र भूतपूर्व हो गया.

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