शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2015

पगलाई भीड़ के समर्थन में भाजपा की सक्रियता

भाजपा और आरएसएस अराजकता का दूसरा नाम है. एक भी नेता नहीं है भाजपा में जो पगलाई भीड़ के दुष्कर्म की निंदा करे. वे हत्या को जायज ठहरा रहे हैं. वे गांधी से लेकर अखलाक तक, हर हत्या को जायज कहते आए हैं.
भाजपा सांसद तरुण विजय ने फरमाया है कि शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं पर ही क्यों डाली जाती है? हमले के भुक्तभोगी होकर भी शांति बनाए रखें!! शायद वे यह कहना चाह रहे हैं कि जो अफवाह फैली वह अखलाक ने ही फैलाई थी और फिर खुद ही मर गया.
केंद्रीय मंत्री और गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा ने दादरी में अखलाक की हत्या को 'दुर्घटना' बताया है. उनका कहना है कि इसे सांप्रदायिक रंग दिए बिना एक दुर्घटना के तौर पर लिया जाना चाहिए.
स्थानीय भाजपा नेता विचित्र तोमर का कहना है, 'पुलिस ने बेकसूर लोगों को गिरफ्तार किया है. हम उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं जो बूचड़खानों से जुड़े हैं. इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं.'
पूर्व भाजपा विधायक नवाब सिंह नागर का कहना है कि उत्तेजना के कारण ऐसी घटना घट गई है. इस घटना में ​जिन युवाओं को गिरफ्तार किया गया है वे 'बेकसूर बच्चे' हैं. 'अगर गोवध और गाय का मांस खाना साबित हो जाता है तो शर्तिया तौर पर पीड़ित परिवार की गलती है. अगर उन्होंने गोमांस खाया है तो वे भी जिम्मेदार हैं. उन्हें यह सोचना चाहिए था कि इसकी प्रतिक्रिया क्या होगी. गोवध हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा हुआ है. स्वाभाविक है कि ऐसी घटनाओं से लोगों का गुस्सा भड़केगा और सांपद्रायिक तनाव फैलेगा. यह ठाकुरों का गांव है और उन्होंने बेहद उग्र तरीके से अपनी भावनाएं जाहिर की हैं।'
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा उपाध्यक्ष श्रीचंद शर्मा ने आरोपियों के बचाव में कहा, 'पीड़ित परिवार के घर से गौमांस मिला है, इसलिए आरोपियों पर हत्या का केस नहीं चलाया जाए. यदि यह मांग नहीं मानी गई तो महापंचायत बुलाई जाएगी. वह व्यक्ति मारपीट से नहीं मरा है, बल्कि उसकी मौत इस अफवाह के सदमे से हुई कि किसी ने उसके बेटे की हत्या कर दी है. जब कोई किसी की भावनाओं को आहत करता है तो इस तरह के संघर्ष होते हैं. हिंदू समाज के लोग गाय की पूजा करते हैं. ऐसे में यदि कोई गाय की हत्या करेगा तो क्या हमारा खून नहीं खोलेगा? हम लोग 11 अक्टूबर को महापंचायत की तैयारी कर रहे हैं. गांव गांव जाकर हम लोगों को लामबंद करेंगे.' मुजफ्फरनगर दंगे में भाजपा की भूमिका याद कीजिए.
पुलिस और आरोपियों को शंका था लेकिन भाजपा के जिलाध्यक्ष ठाकुर हरीश सिंह को पहले से पता है कि गोमांस था. उनका कहना है कि 'स्थानीय लोगों ने पुलिस को गोमांस का सैंपल दिया था लेकिन पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया. इसके बाद लोग उत्तेजित हो गए.' इस हत्या के बाद वह सैंपल कहां गया यह हरीश ही जानें.
भाजपा और संघ का हर नेता भीड़ के भड़कने को जायज कहते हुए हिंदू तालिबान का समर्थन कर रहा है. वे कानून की बात नहीं कर रहे हैं. वे धार्मिक भावनाओं के नतीजतन भड़की भावनाओं को जायज ठहरा रहे हैं. वे आगे भी इस मामले को बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं. धर्म की सनक के नाम तैयार हो रही यह भीड़ आज बेगुनाह मुसलमानों को मारकर अपनी घृणा शांत करेगी. लेकिन धार्मिक घृणा यहीं नहीं रुकती. उसका रास्ता आईएसआईएस तक जाता है. कल को यही पागल भीड़ उस हर व्यक्ति को मारेगी जो उस भीड़ में शामिल होने से इनकार करेगा.
भाजपा और संघ से पूछना चाहिए कि वे अपने देश के कुछ नागरिकों को कुछ नागरिकों का दुश्मन साबित करने पर क्यों तुले हैं? 

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