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October, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हत्याओं पर कौन उत्‍साहित है?

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जनता के पैसे से चलने वाला दूरदर्शन मोहन भागवत को लाइव क्यों प्रसारित करता है? मोहन भागवत के प्रसारण में जनता का कौन सा हित है? वे मोहन भागवत जो मौजूदा भयावह हालात को लेकर इसी भाषण में कहते हैं कि बढ़ा चढ़ा कर पेश की गई छोटी-छोटी घटनाएं हिंदू संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं. छोटी छोटी घटनाएं होती रहती हैं लेकिन ये भारतीय संस्कृति, हिंदू संस्कृति को विकृत नहीं करतीं. उनकी निगाह में देश उत्साहित है. उनके विचार से लगातार दंगों, हत्याओं में भारतीय हिंदू संस्कृति का गौरवगान छिपा है.

दूरदर्शन ने लगातार दूसरी बार मोहन भागवत का भाषण क्यों प्रसारित किया? जनता का पैसा संघ के प्रचार पर क्यों खर्च होगा? पूरी सरकार मोहन भागवत के दरबार में नतमस्तक होकर हिसाब देने क्यों जाती है? जिन लोगों को सोनिया गांधी का सरकार पर नियंत्रण रखना बुरा लगता था, वे अब क्यों चुप हैं. सोनिया गांधी तो फिर भी चुनी हुई सांसद और पार्टी अध्यक्ष रहीं. मोहन भागवत कौन हैं? कोई ऐसा व्यक्ति जो जातीय और धार्मिक आधार पर संगठन चलाता है, वह लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार के ऊपर कैसे है? एक चुनी हुई सरकार के मोहन भागवत के आगे …

भक्तों के नाम खत

प्रिय भक्तों!
आप लोगों से इतनी गालियां खा चुका हूं कि अब आप सब पर गुस्सा आना बंद हो गया है. गीता और महात्मा गांधी की प्रेरणा से मेरा हृदय परिवर्तन हो गया है. मैं स्थि​तप्रज्ञ हो गया हूं. ऐसा इसलिए क्योंकि आप क्रोध के नहीं, आप प्रेम और दया के पात्र हैं. दरअसल, हमको पढ़े लिखे युवा भारत से उम्मीदें ज्यादा थीं. जिस देश का नायक भगत सिंह जैसा 23 साल का युवा हो, जो अपने आदर्शों और अपनी जनता के लिए जानबूझ कर फांसी चढ़ गया, उस देश के युवाओं से यह उम्मीद ज्यादा नहीं है कि वह हमेशा मानवीय मूल्यों और मानवता के पक्ष में खड़ा हो. यह उम्मीद ज्यादा नहीं है कि आपने जो सरकार चुनी है, यदि वह आपकी उम्मीदों पर पानी फेरकर सिर्फ पोलिटिकल स्टंट करती हो तो आप उस पर सवाल उठाकर दबाव बनाएं.

लेकिन अब भरोसा हो गया है कि इस देश का युवा फिलहाल सवाल उठाने वाले को गरियाता है. उसकी नजर में लोकतंत्र, न्याय, समता, सौहार्द, स्वतंत्रता, सेक्युलरिज्म, मुलायम सिंह और ओवैसी पर्यायवाची हैं. वह इन सबको समान भाव से गरियाता है. इसके उलट योगी, साक्षी, संगीत सोम, साध्वी आदि के लिए वह रख सकता है. यह साइकिल एक्सीडेंट की शक्ल में सभ्…

भारतीय राजनीति की बकरी कथा

एक पाकिस्तान पठाऊ देशभक्त हैं. वे बहुत दिनों तक लोगों को पाकिस्तान भेजने पर उतारू थे. लेकिन न कोई गया, न कोई जाने को तैयार हुआ. जिन लोगों को उनने धमकियाया था, उनको भेज भी नहीं पाए. तो फिर उन्होंने पाकिस्तान भेजने की धमकी देना बंद कर दिया. न कोई पाकिस्तान गया, न ले जाया गया. ठीक वैसे जैसे भव्य राम मंदिर बनना तो था, लेकिन न राम मंदिर बना, न बनाया गया. 25 साल तक उपद्रव जरूर मचाया गया.

कलयुग में समय जल्दी जल्दी बदलता है. अवतार भी जल्दी—जल्दी होते हैं. जितनी बार अपने गांव जाता हूं, किसी नये चौडगरे पर एक नये बाबा उग आते हैं. वे पिछले वाले से ताकतवर होते हैं. इसी तरह से अब सियासत में राम मंदिर से ताकतवर सियासी अवतार गाय का है. गांव के बाहर मुर्दहिया में अब डांगर छोड़ आना मौत को न्यौता देकर आना है. जहां कहीं गाय की टांगनुमा कोई आकृति दिखी, आस्था की विकृति फनफना उठती है. फिर जो आगे आया, वह अब मरा कि तब मरा.

एक दिन तो हद हो गई. मैं बस में था और फोन पर बतिया रहा था. मेरा दोस्त फोन की दूसरी तरफ था. उसने कहा, ससुरे तुम बहुत दुष्ट हो. हमने कहा, अच्छा! और तुम तो अल्ला मियां की गाय हो! मेरे भाई, मैं…

किस्सा-ए-गोरक्षा उर्फ गाय पर चर्चा

आज सुबह सुबह गोरक्षा दल के एक सिपाही से गाली खाकर अपने एक भूतपूर्व मित्र की याद ताजा हो गई. एक महीने पहले की दुर्घटना है जब मेरा वह मित्र शहीद हो गया था.
हुआ यह कि दिल्ली चुनाव में धुलाई हो जाने के बाद संस्कारवान कुनबा कनफ्यूजनात्म अवस्था को प्राप्त हो गया. राम मंदिर में जो निवेश आडवाणी जी ने किया था, वह अब दुहने के काबिल नहीं बचा था. तो कुनबे को अचानक गाय की याद आ गई. गाय दुधारू जानवर तो है ही, सियासत में भी उसे दुहा जा सकता है, जहां दूध की जगह वोट निकलता है.
तो दिल्ली चुनाव के बाद और बिहार चुनाव के पहले उक्त मित्र भूतपूर्व हो गए, क्योंकि वे गोरक्षा के लिए शहादत को तैयार थे.
उनके शहादत की कहानी भी बड़ी मारू है. ऐसे ही एक दिन उनके गायात्मक भावुक उच्छवास के दौरान उनसे पूछ लिया कि मित्र आपने कभी गाय पाली है? कभी पूजा पतिंगा किया है या ऐसे ही भावुक हुए जा रहे हैं? वे तुनक कर बोले— तुम सब वामपंथी लोग देशद्रोही हो. मैंने कहा, हम वामपंथी कैसे हुए? और हम लोग कौन? मैं तो तुम्हारे साथ हूं और तुमको माइनस कर दिया जाए तो अकेला हूं.
तो बोले— तुम लोग मतलब रवीश कुमार वगैरह! तुम सब देशद्रोही हो. अब …

गांधी के नाम पर भी झूठ?

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राकेश सिन्हा नाम के एक व्यक्ति संघ विचारक के तौर पर टीवी चैनल पर आते हैं. बरखा दत्त के साथ डिबेट में कह रहे थे कि गांधी बूचड़खाने बंद करने के समर्थक थे. मनीष तिवारी ने गांधी का बयान पढ़कर सुनाया तो राकेश सिन्हा पूछ रहे थे कि ऐसा गांधी ने कहां पर कहा है? यह गलत बयान है. अब या तो उन्होंने गांधी को कभी नहीं पढ़ा या फिर राष्ट्रवाद की तरह गांधी का भी धूर्ततापूर्ण इस्तेमाल करना चाहते हैं. गांधी ने ऐसा कहा है और बार बार कहा है. गांधी ने धर्म को भले हमेशा ऊपर रखा हो, लेकिन गांधी ने कभी इंसान की हत्या की वकालत नहीं की, बल्कि यह कहा कि मैं गाय को मर जाने दूंगा लेकिन इंसान को बचाउंगा. राकेश सिन्हा को गांधी वांग्मय पढ़ना चाहिए और यह समझना चाहिए कि बाकी लोग जो गांधी के नाम का नारा नहीं लगाते, वे भी गांधी को पढ़ते हैं. उनको भी पढ़ना चाहिए और घृणापूर्ण विचारों का प्रसार नहीं करना चाहिए. ऐसा करना आइडिया आॅफ इंडिया के खिलाफ तो है ही, देश के संविधान के भी खिलाफ है. संघ परिवारी जनों को वेद पुराण और उपनिषद छोड़कर पहले संविधान पढ़ना चाहिए.
गांधी के गोरक्षा के बारे में विचार यहां दे रहा हूं. एक हिस्सा मेर…

सबसे बड़े बीफ निर्यातक का शाकाहार

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा बीफ निर्यातक है. दूसरे नंबर पर ब्राजील, तीसरे पर आॅस्ट्रेलिया है. भारत अकेले दुनिया भर का 23 प्रतिशत बीफ निर्यात करता है. एक साल में यह निर्यात 20.8 प्रतिशत बढ़ा है. भारत, ब्राजील, आॅस्ट्रेलिया और अमेरिका द्वारा 2015 में एक मिलियन मैट्रिक टन यानी एक अरब किलो बीफ निर्यात करने की योजना है. अकेले भारत और ब्राजील दुनिया के कुल बीफ निर्यात का 43 प्रतिशत सप्लाई करेंगे. पोर्क और पोल्ट्री के बाद बीफ तीसरे नंबर का मांसाहार है, जिसकी दुनिया भर में मांग है. भारत ने पिछले साल 2082 हजार मैट्रिक टन बीफ का निर्यात किया. भारत की छह प्रमुख गोश्त निर्यात करने वाली कंपनियों में से चार के प्रमुख हिंदू हैं. केंद्र में हिंदूवादी सरकार है जिसका मातृ संगठन आरएसएस गोहत्या के खिलाफ तलवारें खींचे खड़ा रहता है. जब एक व्यक्ति को घर से खींच कर इसलिए मार दिया जाता है कि उसके गोमांस खाने की अफवाह उड़ी थी, जब रांची को इसलिए दंगे की आग जला रही है कि किसी धर्मस्थल के सामने मांस का टुकड़ा मिला था, आपको इस शाकाहारी नारे वाली जन्नत की हकीकत मालूम होनी चाहिए.
द हिंदू अखबार लिखता है कि यूएस डिपार्टमे…

पगलाई भीड़ के समर्थन में भाजपा की सक्रियता

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भाजपा और आरएसएस अराजकता का दूसरा नाम है. एक भी नेता नहीं है भाजपा में जो पगलाई भीड़ के दुष्कर्म की निंदा करे. वे हत्या को जायज ठहरा रहे हैं. वे गांधी से लेकर अखलाक तक, हर हत्या को जायज कहते आए हैं.
भाजपा सांसद तरुण विजय ने फरमाया है कि शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं पर ही क्यों डाली जाती है? हमले के भुक्तभोगी होकर भी शांति बनाए रखें!! शायद वे यह कहना चाह रहे हैं कि जो अफवाह फैली वह अखलाक ने ही फैलाई थी और फिर खुद ही मर गया.
केंद्रीय मंत्री और गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा ने दादरी में अखलाक की हत्या को 'दुर्घटना' बताया है. उनका कहना है कि इसे सांप्रदायिक रंग दिए बिना एक दुर्घटना के तौर पर लिया जाना चाहिए.
स्थानीय भाजपा नेता विचित्र तोमर का कहना है, 'पुलिस ने बेकसूर लोगों को गिरफ्तार किया है. हम उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं जो बूचड़खानों से जुड़े हैं. इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं.'
पूर्व भाजपा विधायक नवाब सिंह नागर का कहना है कि उत्तेजना के कारण ऐसी घटना घट गई है. इस घटना में ​जिन युवाओं को गिरफ्तार किया गया है वे 'बे…