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January, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

साहित्य की सियासत के नामवर

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बिहार में कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजित सरकार की हत्या के आरोप में सज़ा काट रहे कुख्यात बाहुबली पप्पू यादव जेल से छूटे तो जेल में लिखी गई अपनी जीवनी द्रोहकाल का पथिक का लोकार्पण कराया. यहां तक ठीक है. क्योंकि कोई भी यह तर्क दे सकता है कि कोई अपराधी भी किताब लिखने का हक़ रखता है और यह तर्क सही भी है कि सिद्ध अपराधी को भी अभिव्यक्ति का उतना ही अधिकार है, जितना की एक सामान्य नागरिक को. लेकिन वामपंथी नेता की हत्या के अपराधी की किताब का विमोचन किया आलोचना के शीर्ष पर विराजमान धुर वामपंथी नामवर सिंह ने. 
उन्होंने स़िर्फ किताब का विमोचन नहीं किया, बल्कि पप्पू यादव की तारीफ़ में कसीदे भी प़ढे. नामवर सिंह ने पप्पू यादव को सरदार पटेल से भी बेहतर नेता बताते हुए कहा कि राजनीति में बहुत कम लोग पढ़ते-लिखते हैं. सरदार पटेल तक आत्मकथा नहीं लिख पाए. आजकल कोई राजनीतिज्ञ आत्मकथा नहीं लिखता. सब लोग जी-हुजूरी करते हैं. किसी भी पार्टी के नेता ख़तरा नहीं उठाना चाहते, पर पप्पू यादव ने अपनी आत्मकथा में साहस का परिचय दिया है. प्रधानमंत्री तक फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं. पप्पू यादव बड़े जिगर वाले आदमी हैं. वे च…

न्याय के नायक ही अपराधी हुए

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अपनी भंडाफोड पत्रकारिता के लिए मशहूर तहलका पत्रिका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल पर जूनियर सहकर्मी ने यौन उत्पी़डन का आरोप लगाया तो समाज का हर वर्ग स्तब्ध रह गया. ऐसे सवाल उठे कि जो लोग राजनीतिक और सामाजिक शुचिता के लिए झंडे उठाए फिरते हैं, अगर महिलाओं के प्रति वे ही अपराध करने पर उतर आएं, तो महिलाएं क्या करें? ऐसे लोगों के प्रति कैसा सलूक किया जाए? हमने इस प्रकरण पर समाज के विभिन्न वर्ग की महिलाओं के बातचीत करके उनकी राय जानने की कोशिश की- - 

तमाम महिलावादी संगठन यह आरोप लगाते हैं कि समय और समाज बदलने के साथ महिलाओं के शोषण के तरीके भी बदल गए हैं. महिलाओं के लिए पुरुषों के बराबर ख़डे होने के अवसर तो ख़ूब दिखते हैं, लेकिन ये अवसर आभासी हैं. नई बाज़ारवादी संस्कृति में शोषण के तमाम न दिखने वाले स्तर और अदृश्य औज़ार मौजूद हैं, जिनके बहाने जो शक्तिशाली है, वो कमज़ोर का शोषण करता है. अवसर, तरक्की और विकास के माध्यम ही शोषण का साधन बनते हैं, जिसका शिकार ज्यादातर महिलाएं होती हैं. जाने-माने पत्रकार तरुण तेजपाल पर जब उनकी महिला सहकर्मी ने यौन हमले का आरोप लगाया, तो जिसने सुना वह सन्न रह गया. हमन…

कॉरपोरेट के कंधे पर सवार मोदी लहर

नवंबर में अंग्रेज़ी पत्रिका ओपेन ने टीवी चैनलों पर चलने वाली कुछ ख़बरों का विश्‍लेषण करते हुए लेख छापा कि कैसे नेटवर्क-18 के सभी चैनलों में काम करने वाले पत्रकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नर्म रुख़ अपनाएं. नेटवर्क-18 पर उद्योगपति मुकेश अंबानी का क़ब्ज़ा है. कई पत्रकारों ने कहा कि उन्हें स्पष्ट निर्देश है कि मोदी के ख़िलाफ़ कुछ न छापें. उनका कहना है कि नेटवर्क-18 मीडिया समूह की पूरी रीति-नीति ऊपर से तय होती है. इस समूह के सभी चैनलों में काम करने वाले सभी पत्रकारों को पता है कि मोदी विरोधी ख़बरों को प्रसारित करने के बजाय ठिकाने लगाना है. इस समूह में काम कर रहे ब़डे-ब़डे पत्रकार मोदी पर स़िर्फ मीठा बोलते हैं. अन्य चैनल जैसे-आजतक, टाइम्स नाउ आदि भी किस तरह से मोदी के समर्थन में ही ख़बरें चलाते हैं, पत्रिका इसकी भी प़डताल करती है. जिन चैनलों पर कॉरपोरेट घरानों का क़ब्ज़ा है, उन्हें भी स्पष्ट निर्देश है कि मोदी के प्रति नरमी बरतें और अधिक से अधिक कवरेज दें, उनकी रैली को बिना काटे हुए सीधे प्रसारित करें. मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है, वह किसी एक व्यक्ति या …

मोदी के विकास मॉडल का सच—1

यदि कोई यह कहता है कि मुझे मौका दीजिए, मैं देश का भाग्य बदल दूंगा तो आप इस पर कैसे विश्वास करेंगे? जाहिर है कि आप उसके अतीत खंगालेंगे कि उसने आखिर अबतक क्या किया है. मोदी का भाषण तथ्यों पर गौर किए बगैर सुनिए, तो आप खुशफहमी से सराबोर हो सकते हैं. बहुत से साथियों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं. आइए, उनके दावों के बरअक्स एक नजर डालते हैं गुजरात के विकास पर...

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि पे प्रधानमंत्री बनकर दुनिया भर में शिक्षा, शिक्षक और ज्ञान का निर्यात करेंगे. क्या गुजरात की शिक्षा के उन्होंने बेहतर बनाया है? बीती 12 जनवरी को अहमदाबाद में एक सेमिनार के दौरान ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉड्र्स के सदस्य लॉर्ड भीखू परीख ने गुजरात में उच्च शिक्षा की स्थिति पर कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात में उच्च शिक्षा का स्तर काफी नीचा है.
दूसरी ओर,पिछले हफ्ते National University Education Planning and Administration की रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें प्राथमिक शिक्षा के मामले में गुजरात की रैंक 28वीं है. अपर प्राइमरी शिक्षा के मामले गुजरात 14वें स्थान पर है.
गुजरात सरकार ने मई 2012 में उच्च न्…