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नये उपग्रह की खोज बनाम गोरक्षा

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पश्चिमी वैज्ञानिकों ने अभी अभी एक नया ग्रह खोजा. उसी समय भारत के महान शिक्षाविद बाबा बत्रा कह रहे
हैं कि स्कूलों में गोसेवा और सूर्यस्नान पढ़ाया जाए. वे गुजरात में पढ़ाए भी जा रहे हैं. पोप फ्रांसिस ने विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी और क्रमिक उद्विकास के सिद्धांत को स्वीकार किया. हमारे एक महा धर्मगुरु बााब रामदेव कह रहे हैं कि 'बच्चों को वैज्ञानिक सिद्धांतों की जगह पढ़ाया जाए कि हम सब ईश्वर की संतान हैं और गुुरुकुल परंपरा फिर से शुरू की जाए.' उनकी वैज्ञानिक खोजों की यात्रा अनवरत जारी है. डार्विन की किताब On the Origin of Species 1859 में ही छप गई थी, जिसने चर्च और धार्मिक मान्यताओं की धज्जियां उड़ाकर सारी अंध—आस्थाओं को ध्वस्त कर दिया था. अब उनका धर्म प्रगतिशीलता दिखाते हुए इतने लंबे धर्म और विज्ञान के संघर्ष के बाद उसको स्वीकृति दे रहा है. ठीक उसी समय भारत के धार्मिक लोग इस बात के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि एक युवक और युवती सार्वजनिक तौर पर हाथ में हाथ डालकर चल कैसे सकते हैं? वे संघर्ष कर रहे हैं कि हिंदू और मुसलमान अगर प्रेम में भी हों, तो शादी कैसे कर सकते हैं? ठीक इसी समय गोहाना क…

प्रधानमंत्री जी को एक पत्र

आदरणीय प्रधानमंत्री जी
आपके विरोधियों को पाकिस्तान भेजने वाले गिरिराज सिंह को आपने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी है. ये वही गिरिराज सिंह हैं जिनके घर से चोरी करने वाले आरोपियों के पास से करोड़ों रुपये की नकदी व गहने मिले थे और इस पर उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. आप लोकसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के पहले से अबतक कांग्रेसमुक्त भारत की बात कहते रहे हैं. यह मुक्ति सिर्फ कांग्रेस पार्टी से लेनी थी, या कांग्रेस के अलोकतांत्रिक कुकृत्यों से भी? देशवासियों को तो आप वही सब अता कर रहे हैं जो कांग्रेस करती रही है. आपकी सरकार बनते ही आपने अपने मंत्रिमंडल में एक ऐसे मंत्री को जगह दी, जिनपर बलात्कार का आरोप था. आपके एक मंत्री जी की संपत्ति पांच महीने में अचानक दस करोड़ से ज्यादा बढ़कर दोगुनी हो गई. आपने इनपर कोई सफाई नहीं दी, न ही कोई कार्यवाही की.
यकीनन भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक हो चुकी कांग्रेस पार्टी से जनता ने मुक्ति लेनी चाही और आपको मौका दिया लेकिन आपने कांग्रेस के कुछ नेताओं और उनकी सारी भ्रष्ट अलोकतांत्रिक प्रवृत्तियों को ज्यों का त्यों अपना लिया. आपने कभी यह संदेश नहीं दिया कि एक पार्…

अच्छे दिन

मित्रों! नई सरकार के आने पर अच्छे दिन आने थे. कहा जा रहा है कि अच्छे दिन आ गए हैं. आइए अच्छे दिनों की पड़ताल करें कि वे कैसे हैं, किसके लिए आए हैं? 

1. गुजरात में दो संवेदनशील फर्जी मुठभेड़ों के केस में सीबीआई के पब्लिक प्रॉसीक्यूटर बदल दिए गए हैं. सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति केस देख रहे सीबीआई के वकील ऐजाज खान और सादिक जमाल केस देख रहे आईएच सैयद को रिलीव कर दिया गया है. ऐजाज खान की जगह पीवी राजू पब्लिक प्रॉसीक्यूटर हांगे. सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति केस में अमित शाह पर आरोप हैं.

2. 2004 में हुए इशरत जहां मुठभेड़ मामले में अभियुक्त आईपीएस अधिकारी जीएल सिंघल को बहाल कर दिया गया है. इस पर मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त जूलियो एफ़ रिबेरियो की प्रतिक्रिया है कि 'ऐसा पहले नहीं होता था, कोई पुलिस अधिकारी अगर किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त बनाया गया हो और जेल गया हो तो उसका निलंबन तब तक ख़त्म नहीं होता था जब तक अदालत से वह बरी न हो जाए. यह मैं नया चलन देख रहा हूँ. ऐसा तब तक नहीं हो सकता जब तक आप नियमों को बदल नहीं देते हैं. मुझे लगता है कि नियमों को बदल दिया गया है. यह सब कुछ नया है. म…

जय धनतंत्र

संसद में गूलर का फूल पाया जाता है. वहां पहुंचने के बाद लोगों की संपत्तियां बेतहाशा बढ़ती हैं. वर्तमान लोकसभा में 157 सांसद ऐसे हैं जो 2004 में भी सांसद चुने गए थे. इनमें से 145 ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच सालों में बेतहाशा बढ़ी. 16 मौजूदा सांसद ऐसे हैं जिनकी सं​पत्ति में 500 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई. 77 सांसद ऐसे हैं जिनकी दौलत सौ प्रतिशत तक बढ़ी. 
कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल के पास 2004 में 12.12 करोड़ रुपये थे. अब 131 करोड़ हैं. कांग्रेसी सांसद लगड़ापति राजगोपाल के पास 2004 में 9.91 करोड़ थे, अब 122 करोड़ हैं. पल्लम राजू के पास तब 1.2 करोड़ की दौलत थी, अब 6.55 करोड़ है. कांग्रेसी सांसद भारत सिंह सोलंकी के पास 04 में 9 लाख रुपये थे, अब 3.9 करोड़ हैं. 
भाजपा सांसद उदय सिंह के पास 04 में 3.6 करोड़ की दौलत थी, अब 41 करोड़ है. सचिन पायलट के पास 25 लाख थी, अब 4.64 करोड़ है. कांग्रेसी सांसद मेकापति राजमोहन रेड्डी के पास तब 5.52 करोड़ की दौलत थी, अब 36.34 करोड़ है. 
संदीप दीक्षित की संपत्ति 2009 के आम चुनाव में 1.8 करोड़ थी. अब बढ़कर 7.3 करोड़ हो गई है. कपिल सिब्बल की संपत्ति में तीन साल में…

मां धड़क रही है सीने में

नींद का एक सिलसिला था जो टूटा है अभी 
कोई सदियों का सफर करके लौट आया है
था तो सपना ही मगर, सच से कुछ ज्यादा सच था
ऐसा सपना भी बहुत रोज बाद आया है
देखता हूं कि कोई रात है, सियाह रात 
और मैं थक के यूं बेफिक्र सो गया हूं कहीं 
बिना बिस्तर, बिना तकिए के, बिना चादर के


घर के सब काम, कुछ वजह के, बिना वजहा के 
सारे निपटा के मुझे खोजते मां आ पहुंची 
ऐसे सोया हुआ देखा तो बस तड़प उट्ठी 
सर पे रखके हथेली, हौले से हिला के कहा 
अरे उठो तो सही ऐसे क्यूं पड़े हो यहां 
आज वो सब तो बनाया है, जो पसंद तुम्हें
रोटियां बाजरे की घी में डुबाई है खूब
चने की दाल क्या जतन से बनाई है खूब 
उठो चलो कि आज साथ मेरे खाओगे न? 

पकड़ के हाथ मैंने पास मां को खींच लिया
बेझिझक पास आ गई तो कस के भींच लिया—
पहले इक बात सुनो, बाद में खिला देना
बस जरा देर को आंचल उतान दो मुंह पर 
जरा—सा आज बचपने में लौटना है मुझे 
ऐसा लगता है कि सोया नहीं हूं बरसों से 
लिपट के आज तेरे सीने से सोना है मुझे 

गाल पे नर्म सा एहसास मां के हाथों का 
और मैं कांप गया,रूह तक सिहर—सा गया
आह! जैसे जहां उस गोद में ठहर—सा गया
कोई खटका—सा हुआ नींद मुई टूट गई
ओफ्फ! ये सख्त घड़ी, जैसे …

साहित्य की सियासत के नामवर

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बिहार में कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक अजित सरकार की हत्या के आरोप में सज़ा काट रहे कुख्यात बाहुबली पप्पू यादव जेल से छूटे तो जेल में लिखी गई अपनी जीवनी द्रोहकाल का पथिक का लोकार्पण कराया. यहां तक ठीक है. क्योंकि कोई भी यह तर्क दे सकता है कि कोई अपराधी भी किताब लिखने का हक़ रखता है और यह तर्क सही भी है कि सिद्ध अपराधी को भी अभिव्यक्ति का उतना ही अधिकार है, जितना की एक सामान्य नागरिक को. लेकिन वामपंथी नेता की हत्या के अपराधी की किताब का विमोचन किया आलोचना के शीर्ष पर विराजमान धुर वामपंथी नामवर सिंह ने. 
उन्होंने स़िर्फ किताब का विमोचन नहीं किया, बल्कि पप्पू यादव की तारीफ़ में कसीदे भी प़ढे. नामवर सिंह ने पप्पू यादव को सरदार पटेल से भी बेहतर नेता बताते हुए कहा कि राजनीति में बहुत कम लोग पढ़ते-लिखते हैं. सरदार पटेल तक आत्मकथा नहीं लिख पाए. आजकल कोई राजनीतिज्ञ आत्मकथा नहीं लिखता. सब लोग जी-हुजूरी करते हैं. किसी भी पार्टी के नेता ख़तरा नहीं उठाना चाहते, पर पप्पू यादव ने अपनी आत्मकथा में साहस का परिचय दिया है. प्रधानमंत्री तक फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं. पप्पू यादव बड़े जिगर वाले आदमी हैं. वे च…

न्याय के नायक ही अपराधी हुए

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अपनी भंडाफोड पत्रकारिता के लिए मशहूर तहलका पत्रिका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल पर जूनियर सहकर्मी ने यौन उत्पी़डन का आरोप लगाया तो समाज का हर वर्ग स्तब्ध रह गया. ऐसे सवाल उठे कि जो लोग राजनीतिक और सामाजिक शुचिता के लिए झंडे उठाए फिरते हैं, अगर महिलाओं के प्रति वे ही अपराध करने पर उतर आएं, तो महिलाएं क्या करें? ऐसे लोगों के प्रति कैसा सलूक किया जाए? हमने इस प्रकरण पर समाज के विभिन्न वर्ग की महिलाओं के बातचीत करके उनकी राय जानने की कोशिश की- - 

तमाम महिलावादी संगठन यह आरोप लगाते हैं कि समय और समाज बदलने के साथ महिलाओं के शोषण के तरीके भी बदल गए हैं. महिलाओं के लिए पुरुषों के बराबर ख़डे होने के अवसर तो ख़ूब दिखते हैं, लेकिन ये अवसर आभासी हैं. नई बाज़ारवादी संस्कृति में शोषण के तमाम न दिखने वाले स्तर और अदृश्य औज़ार मौजूद हैं, जिनके बहाने जो शक्तिशाली है, वो कमज़ोर का शोषण करता है. अवसर, तरक्की और विकास के माध्यम ही शोषण का साधन बनते हैं, जिसका शिकार ज्यादातर महिलाएं होती हैं. जाने-माने पत्रकार तरुण तेजपाल पर जब उनकी महिला सहकर्मी ने यौन हमले का आरोप लगाया, तो जिसने सुना वह सन्न रह गया. हमन…

कॉरपोरेट के कंधे पर सवार मोदी लहर

नवंबर में अंग्रेज़ी पत्रिका ओपेन ने टीवी चैनलों पर चलने वाली कुछ ख़बरों का विश्‍लेषण करते हुए लेख छापा कि कैसे नेटवर्क-18 के सभी चैनलों में काम करने वाले पत्रकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नर्म रुख़ अपनाएं. नेटवर्क-18 पर उद्योगपति मुकेश अंबानी का क़ब्ज़ा है. कई पत्रकारों ने कहा कि उन्हें स्पष्ट निर्देश है कि मोदी के ख़िलाफ़ कुछ न छापें. उनका कहना है कि नेटवर्क-18 मीडिया समूह की पूरी रीति-नीति ऊपर से तय होती है. इस समूह के सभी चैनलों में काम करने वाले सभी पत्रकारों को पता है कि मोदी विरोधी ख़बरों को प्रसारित करने के बजाय ठिकाने लगाना है. इस समूह में काम कर रहे ब़डे-ब़डे पत्रकार मोदी पर स़िर्फ मीठा बोलते हैं. अन्य चैनल जैसे-आजतक, टाइम्स नाउ आदि भी किस तरह से मोदी के समर्थन में ही ख़बरें चलाते हैं, पत्रिका इसकी भी प़डताल करती है. जिन चैनलों पर कॉरपोरेट घरानों का क़ब्ज़ा है, उन्हें भी स्पष्ट निर्देश है कि मोदी के प्रति नरमी बरतें और अधिक से अधिक कवरेज दें, उनकी रैली को बिना काटे हुए सीधे प्रसारित करें. मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है, वह किसी एक व्यक्ति या …

मोदी के विकास मॉडल का सच—1

यदि कोई यह कहता है कि मुझे मौका दीजिए, मैं देश का भाग्य बदल दूंगा तो आप इस पर कैसे विश्वास करेंगे? जाहिर है कि आप उसके अतीत खंगालेंगे कि उसने आखिर अबतक क्या किया है. मोदी का भाषण तथ्यों पर गौर किए बगैर सुनिए, तो आप खुशफहमी से सराबोर हो सकते हैं. बहुत से साथियों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं. आइए, उनके दावों के बरअक्स एक नजर डालते हैं गुजरात के विकास पर...

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि पे प्रधानमंत्री बनकर दुनिया भर में शिक्षा, शिक्षक और ज्ञान का निर्यात करेंगे. क्या गुजरात की शिक्षा के उन्होंने बेहतर बनाया है? बीती 12 जनवरी को अहमदाबाद में एक सेमिनार के दौरान ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉड्र्स के सदस्य लॉर्ड भीखू परीख ने गुजरात में उच्च शिक्षा की स्थिति पर कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात में उच्च शिक्षा का स्तर काफी नीचा है.
दूसरी ओर,पिछले हफ्ते National University Education Planning and Administration की रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें प्राथमिक शिक्षा के मामले में गुजरात की रैंक 28वीं है. अपर प्राइमरी शिक्षा के मामले गुजरात 14वें स्थान पर है.
गुजरात सरकार ने मई 2012 में उच्च न्…