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आधी सदी में मर गईं 250 भाषाएं

कहा जाता है कि दि किसी सभ्यता अथवा संस्कृति को नष्ट करना है तो उसकी भाषा नष्ट कर दीजिए। भाषा किसी समुदाय विशेष की सांस्कृतिक पहचान होती है, जो कि तेजी से नष्ट हो रही है। वैश्वीकरण ने दुनिया को एक गांव में तब्दील करके हमें सिर्फ फायदे पहुंचाए हों, ऐसा नहीं है। इसने हमसे बहुत कुछ छीना है। छोटी-छोटी संस्कृतियां वैश्वीकरण की धारा में तिनकों की तरह बह रही हैं। उनकी बोंली-भाषा, उनकी सांस्कृतिक-सामाजिक पहचान आदि पर गंभीर संकट है। हाल ही में एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछले 50 सालों में भारत में 250 भाषाएं नष्ट हों गईं। सर्वेक्षण में दावा किया गया है भाषाएं अलग-अलग वजहों से ब़डी तेजी से मर रही हैं।
इससे पहले इस तरह का कोई सर्वेक्षण ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज अधिकारी जॉन अब्राहम ग्रियर्सन की अगुआई में 1894-1928 के बीच इस तरह का भाषाई सर्वे हुआ था। उसके करीब सौ साल बाद भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर नामक संस्था की ओर से भारतीय भाषाओं का लोक सर्वेक्षण (पीएलएसआइ) किया गया। करीब सदी भर बाद अपने तरह का यह पहला सर्वे है। इसमें कहा गया है कि 1961 में भारत में 1100 भाषाएं बोली जाती थीं। पिछले 50…