क्षद्म मार्क्सवादी कहे जाने पर....






हाँ,  मुझे सहानुभूति है 
उन लोगों से 
जो मारे गए 
एक टुकड़ा रोटी के लिए 
यह मानने में मुझे परेशानी है 
की कोई आदमी
भूख से मर सकता है 
ऐसा कहना, आदमी को
सूअर से भी गया गुज़रा ठहराना है 
कि वह अपना पेट नहीं भर सकता 
जबकि मैंने आदमी को 
पहाड़ खोद कर खाते देखा है 
वह कम से कम भूख से नहीं मर सकता 
आत्महत्या तो वह करता है 
षड्यंत्रों से आहत होकर!

मैं घोषणा करता हूँ 
कि मैं उनका पक्षधर हूँ 
मैं विरोध करता इन क्रूर हत्याओं का 
यदि यह मार्क्सवाद है 
तो मार्क्सवादी हूँ 
नक्सलवाद है 
तो नक्सलवादी हूँ 
माओवाद है
तो माओवादी हूँ 
गांधीवाद है 
तो गांधीवादी हूँ 
यदि मानववाद कहो इसे 
तो मानववादी हूँ 
तुम कहो इसे देशद्रोह 
तो मुझे ख़ुशी होगी 
पर मैं उन लाखों मौतों का 
विरोध करता हूँ 

वाकई बंधू 
मैं नहीं चाहता ऐसा देश 
जहाँ बिना भंडुआ हुए 
पेट पालना मुश्किल हो
कहो
कोई उज्र है तुम्हें.....?

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