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कविता लिखकर क्या होगा

मैंने सोचा
कविता लिखकर क्या होगा  मेरे कविता लिखने से  कुछ  उखड़ेगा?
मनीराम राम मर गया  लगाकर फांसी राम फेर को था बुखार  टें हो गया दवा दारू बिन  तब भी मैं कविता लिखता था  उसका कुछ भी तो नहीं हुआ  धनी राम के घर दो दिन से  चूल्हा नहीं जला है  क्या मेरी कविताएं उसकी खातिर  कुछ भी कर सकती है ? एक जून की रोटी  उसको दे सकती है ?
कविताओं का क्या होगा  धरे धरे अलमारी में सड़ जाएंगी  चूहे चीकट कुतर कुतर कर खाएंगे टुटहा  घर है  एक रोज़ गिर जाएगा  कविता सविता माटी में मिल जाएगी 
तब तक हाथ झाड़ता मघई आया  बोला भैया इधर लिखा कुछ ताज़ा? लाओ सुनाओ  मन बहलाओ  इस दुनिया में बड़ा नरक है  घर से बहार तक झंझट है  ज़रा देर को सबसे मुक्ति दिलाओ 
हम सब अनपढ़  तुम्ही से तो आसा है  बदलो यह, कोई और जमाना लाओ 
वह अपने घर चला गया जब मैंने कलम उठाई  और लिखी एक कविता 

चंदू

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चंदू सड़क किनारे रहता है  बाटी चोखा और समोसा  सिगरेट चाय बेचता है  एक तखत, माटी की भट्टी  तानी हुई पन्नी की चादर  इतनी है  बस उसकी दौलत  दो पिल्ले जैसे नवजात  वहीं बगल में सारा दिन  माटी में लोटते रहते हैं  रोते कभी किलकते हैं  कीचड़ में लिजलिज करते हैं  चंदू की बीवी इस पर  खुश होती है, झल्लाती है  झाड़-पोछ कर, चूमचाट  कर  माटी में बैठाती है  चंदू के संग कामों में  जुटती है हाथ बंटाती  है 
दुबला-पतला डांगर जैसा  चंदू दिन भर हँसता है  आने जाने वालों से वह  खूब मसखरी करता है  बीवी को वह मेरी प्यारी बिल्लोरानी  कहता है 
लोकतंत्र की नज़र में चंदू  एक अतिक्रमणकारी है  कुछ कुछ दिन पर उसकी झुग्गी  समतल कर दी जाती है एक रोज़ दो रोज़ में लेकिन  फिर से वह तन जाती है 
चंदू के सपने में अक्सर हल्ला गाड़ी (अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता) आती है  मारे डर के रात में उसकी  आँखें खुल-खुल जाती हैं  कहता है चंदू हंसकर  सब अपना-अपना काम करें   वो अपना कानून चलायें  हम रोटी का इंतजाम करें 
यही झेलते सहते बाबू! उमर बयालीस पार गयी  भटक भटक जीवन काटा पर  नहीं हमारी हार हुई.

एक ग़ज़ल

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मेरी उनकी ऐसी साझेदारी है 
रोटी पर हक उनका भूख हमारी है 
मालिक बोला सारा भूसा तू ले जा  जितनी है अनाज की राशि, हमारी है 
कल के दिन कैसे बच्चों का पेट भरूं सोच सोच कर सारी रात गुजारी है 
कहते हैं ये मुल्क था सोने की चिड़िया  भूख जहाँ सबसे घातक बीमारी है 
मोंसैंटो की रोटी सबसे ताकतवर  घर घर चस्पा विज्ञापन सरकारी है 

उसने मुझसे कहा

उसने मुझसे कहा 
मेरा मोबाइल कितना सुन्दर है  इस पर कविता लिखो  मेरी स्कूटी कैसा उड़ती है  कभी इस पर भी कविता लिखो  लैपटॉप भी अच्छा है  इस पर भी तो लिखो  और जो गाड़ी दी है  पापा ने  वो सच में कितनी डैशिंग है  उस पर इक कविता लिखो 
उसकी बातें सुनते सुनते  आसमान मैं देख रहा था  चाँद सितारे बादल बिजली   खोज रहा था

जब भी मेरे अंतर्मन में

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जबभीमेरेअंतर्मनमें उमड़ाप्रेमतुम्हारा जीचाहातुमकोयहबातबताऊं कैसेसागरउमड़रहाहै भीतर, यहदिखलाऊं तुमहोलेकिनदूरप्रिये कैसेसंभवहोपाता आंखोंसेआंखोंकीभाषामें तुमकोसमझाऊं
मैंनेहाथबढ़ाअंबरमें कोमलसुंदरसेअक्षरमें

74 का हुआ 'बेतार का खबर'

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देशमेंऐसाशायदहीकोईव्यक्तिहोगा, जिसनेकभीबेतारकाखबर, मेरामतलबहैरेडियोनसुनाहो।औरसुननेकेसाथ-साथहरकिसीकाअपनाकोईनकोईबहुतहीरोचककिस्मकाअनुभवरेडियोकेसाथनिश्चितहीजुड़ाहुआहोगा।अगरमैंअपनीबातकरूंतोमेरेदादासेलेकरमुझतक, यानीमेरंपरिवारमेंफिल्मीगानोंसेहरकिसीकापरिचयरेडियोकेमाध्यमसेहीहुआ।आपकेसाथभीकमोबेशऐसाहीहुआहोगा।आजभीरेडियोऐसामाध्यमहैजोआपकोफिल्मीगॉसिपसेलेकरशहरमेंजामतककेबारेमेंबताताहै।शॉर्टवेबप्रसारणकोअगरआजके