मंगलवार, 14 जून 2011

कई बरस के बाद

कई बरस के बाद लौटकर आया गांव 
कई बरस के बाद भरा अंखियन में गांव 
कई बरस के बाद मिली अपनी माटी
कई बरस के बाद महक उसकी पायी
कई बरस के बाद पिया जी भर पानी 
कई बरस के बाद भरी सीने में सांस 
कई बरस के बाद  छुआ है पेड़ों को 
कई बरस के बाद निहारा खेतों को 
कई बरस के बाद गाय को पुचकारा 
कई बरस के बाद मिली गोबर की गंध 
कई बरस के बाद भगा बछरू के संग 
कई बरस के बाद सना कीचड़ में हाथ 
कई बरस के बाद आज सूरज देखा 
कई बरस के बाद नज़र आया है चांद
कई बरस के बाद पसीना महका है 
कई बरस के बाद मिली बरगद की छांव 
कई बरस के बाद पिता ने झिडकी दी 
कई बरस के बाद फिरा सर माँ का हाथ
कई बरस के बाद मिली सोंधी रोटी 
कई बरस के बाद नमक-मिर्चा है साथ 
कई बरस के बाद आज महसूस हुआ 
मेरे भीतर अभी बचा है मेरा गांव

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