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जान की कीमत पर सूचना का अधिकार

सूचनाकेअधिकारकानूननेनागरिकोंकोपारदर्शीप्रशासनकाएकहथियारभलेदेदियाहो, लेकिननागरिकोंकाभ्रष्टव्यवस्थाकेखिलाफलामबंदहोनाआजभीतलवारकीधारपरचलनेजसाहै।एकओरजहांइसनायाबहथियारकाप्रयोगकरतमाममहत्वपूर्णउपलब्धियांहासिलहुईंतोकईजोशीलेऔरकर्मठनवजवानोंकोअपनीजानेंभीगंवानीपड़ीहै।औरआश्चर्यजनकबाततोयहहैकिआरटीआईकार्यकर्ताओंकेखिलाफहिंसाकेमामलेलगातारबढ़तेजारहेहैं।
शुक्रवारकोगुजरातकेपोरबंदरमेंइसीतरहकीएकघटनाफिरघटी, जहांबाघूदेवानीनामकेएक

चंदू

चंदू सड़क किनारे रहता है  बाटी चोखा और समोसा  सिगरेट चाय बेचता है  एक तखत, माटी की भट्टी  तानी हुई पन्नी की चादर  इतनी है  बस उसकी दौलत  दो पिल्ले जैसे नवजात  वहीं बगल में सारा दिन  माटी में लोटते रहते हैं  रोते कभी किलकते हैं  कीचड़ में लिजलिज करते हैं  चंदू की बीवी इस पर  खुश होती है, झल्लाती है  झाड़-पोछ कर, चूमचाट  कर  माटी में बैठाती है  चंदू के संग कामों में  जुटती है हाथ बंटाती  है 
दुबला-पतला डांगर जैसा  चंदू दिन भर हँसता है  आने जाने वालों से वह  खूब मसखरी करता है  बीवी को वह मेरी प्यारी बिल्लोरानी  कहता है 
लोकतंत्र की नज़र में चंदू  एक अतिक्रमणकारी है  कुछ कुछ दिन पर उसकी झुग्गी  समतल कर दी जाती है एक रोज़ दो रोज़ में लेकिन  फिर से वह तन जाती है 
चंदू के सपने में अक्सर हल्ला गाड़ी (अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता) आती है  मारे डर के रात में उसकी  आँखें खुल-खुल जाती हैं  कहता है चंदू हंसकर  सब अपना-अपना काम करें   वो अपना कानून चलायें  हम रोटी का इंतजाम करें 
यही झेलते सहते बाबू! उमर बयालीस पार गयी  भटक भटक जीवन काटा पर  नहीं हमारी हार हुई.




कई बरस के बाद

कई बरस के बाद लौटकर आया गांव  कई बरस के बाद भरा अंखियन में गांव  कई बरस के बाद मिली अपनी माटी कई बरस के बाद महक उसकी पायी कई बरस के बाद पिया जी भर पानी  कई बरस के बाद भरी सीने में सांस  कई बरस के बाद  छुआ है पेड़ों को  कई बरस के बाद निहारा खेतों को  कई बरस के बाद गाय को पुचकारा  कई बरस के बाद मिली गोबर की गंध  कई बरस के बाद भगा बछरू के संग  कई बरस के बाद सना कीचड़ में हाथ  कई बरस के बाद आज सूरज देखा  कई बरस के बाद नज़र आया है चांद कई बरस के बाद पसीना महका है  कई बरस के बाद मिली बरगद की छांव  कई बरस के बाद पिता ने झिडकी दी  कई बरस के बाद फिरा सर माँ का हाथ कई बरस के बाद मिली सोंधी रोटी  कई बरस के बाद नमक-मिर्चा है साथ  कई बरस के बाद आज महसूस हुआ  मेरे भीतर अभी बचा है मेरा गांव

सवाल व्यवस्था परिवर्तन का है

बुधवारकोराजघाटपरअन्नाकेसमर्थनमेंएकत्रहुई, भजनोंपरझूमतीजनताकोदेखकरदिग्विजयसिंहकहसकतेहैंकियहनचनियोंऔरगवैयोंकाजमावड़ाहै, लेकिनयहबातदिग्विजयसिंहसहितहरपार्टीकानेताजानताहैकिनतोवेनाचने-गानेवालेलोगहैंऔरनहीवेकोईऐसाकामकररहेहैंजिसेउच्छृंखलकहकरआंखेंमूंदलीजाये।वेजानतेहैंकिस्थितियांआंखमूंदनेवालीनहीं, नींदउड़ानेवालीहैं।वरना