शनिवार, 14 मई 2011

अभी बाकी है

अभी बाकी है 
उन सपनों का पकना 
जो उगाए हैं तुमने जतन से 
मेरी आंखों में 
चुन-चुन कर इन्हें
तेरे आँचल में टांकना-सजाना 
अभी बाकी है 
तेरी राहों पे चलना- चलते जाना... 
वहां तक जहां बसेगा 
तेरे सपनों का जहां 
अभी बाकी है 
मेरा कण-कण बिखरना 
तेरे हाथों फिर-फिर गढ़ा जाना 
अभी बाकी है 
मेरा जीना-मरना 
तुम्हारी अस्थि-मज्जा से 
आकार लेना 
तेरे स्त्रीत्व से भरना-जना जाना 
अभी बाकी है 
तेरी स्त्री का मुझमे उतरना 
हमारे वजूद का मिलना-मिटना 
शून्य हो जाना 
अभी तो सब बाकी है...

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