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आज रात तुम छत पर रहना
बदल ओढ़ के आऊंगा मैं
सारी रात तेरे दामन में
खूब झमाझम बरसूँगा
एक चाँद का सुर्ख बताशा
लाऊंगा जो तुम्हे पसंद हैं
और तारों का लडीदार
इक उजला गजरा लाऊंगा 
रात को लोरी गाते गाते 
सर पे तेरे सजाऊंगा 
नींद में जब तू बह जाएगी 
मैं सपना बन जाऊंगा 
खारी खारी शीरीं शीरीं 
रात ज़बां पर तुम रख लेना
भर ले आऊंगा अंजुरी में 
आसमान सारा पी लेना 
अगर लाज लागे तुमको तो 
उफक खींच कर तन ढँक लेना 
और देखना साथ बरसने का होता 
क्या खूब जायका!


आज रात तुम छत पर रहना 
बादल ओढ़ के आऊंगा मैं.....

रात के पिछले पहर
जब ज़मीन से आसमान तक
बरस रहा था सन्नाटा
किसी के ख्याल ने
काँधे पे रख के हाथ
धीरे से कहा कान में
यार बहुत तन्हाई है
कुछ बात करो....
रोज़ आया करो ऐसे ही
भोर की उजास के साथ
जब गूंज उठती है कायनात
जब बज उठते हैं दिन
मुस्करा उठता है आसमान
भर जाते हैं हर शै में वजूद
उतर कर मेरी रगों में
भर दिया करो
सांसों में अर्थ
सोना...!
सूचना युग का क्रांतिकारी जुलियन असांजे

अपने कारनामों से अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के लिए नीतिगत स्तर पर मुश्किलें खड़ी करने वाले जुलियन असांजे आस्ट्रेलियाई पत्रकार और इंटरनेट एक्टिविस्ट हैं. उन्होंने 2006 में  भंडाफोड़ करने वाली साइट विकीलीक्स की स्थापना की. दुनिया उन्हें विकीलीक्स के एडीटर इन चीफ और प्रवक्ता के तौर पर जानने से ज्यादा इस बात के लिए जानती है कि उन्होंने अमेरिका के राजनीतिक और आपराधिक कारनामों का खुलासा करने वाले लाखों गुप्त दस्तावेजों को आनलाइन करके अमेरिका को विश्वबिरादरी में रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है. अमेरिका के तमाम स्याह-सफेद सच दुनिया के सामने आ गये हैं, जिससे अमेरिका काफी असहज हो गया है. विकीलीक्स पर अबतक इराक, अफगानिस्तान और अमेरिका से जुड़े युद्धों के लाखों महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक हो चुके हैं. इन दस्तावेजों ने अमेरिका और नाटो के गंभीर युद्ध अपराधों को दुनिया के सामने ला दिया है. अमेरिका और उसके समर्थक देश जहां असांजे को अपना दुश्मन मानने लगे हैं, तो दुनिया भर में अचानक उनके लाखों प्रशंसक पैदा हो गये हैं. उनके कामकाज का तरीका गोपनीय और दुनिया भर को ह…
देश को एक और गांधी और जय प्रकाश की जरूरत है

कारपोरेट घरानों, मीडिया और नेताओं के बीच गठबंधन के इस सुविधावादी दौर में कुछ लोग जो हर तरह के अन्याय के खिलाफ बोलने की हिम्मत रखते हैं, उन्हीं में से एक हैं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण.  वे सुप्रीम कोर्ट के नामचीन वकीलों में शुमार हैं लेकिन उनकी शोहरत इसलिए नहीं है कि वे बहुत बड़े और तेज-तर्रार वकील हैं. बल्कि उनकी शोहरत न्यायपालिका की जवाबदेही तय करने और नागरिक अधिकारों के लिए किए जाने वाले उनके संघर्ष को लेकर है. वे करीब तीन दशक से न्यायपालिका और कार्यपालिका सहित समूची व्यवस्था से लोहा ले रहे हैं. उनके शब्दों में उनकी लड़ाई ’ऐसे लोगों से है जो व्हाइट कालर (सफेदपोश) माफिया हैं. जो घूस देकर बेईमानी करवाते हैं.’ जो अपना काम निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, लेकिन जहां सुविधा होती है, वहां आदर्शवाद भी बघारते हैं. प्रशांत भूषण कहते हैं मैं हर उस बात के खिलाफ हूं जो आम आदमी के अधिकारों के खिलाफ जाती हैं.
प्रशांत भूषण की पारिवारिक पृष्ठभूमि ऐसी है, जहां से वे हर संभव और मनचाहा रास्ता चुन सकते थे. उन्होंने एक कठिन राह चुनी है. उनके पिता …
दिल्ली की लाल बत्तियों पर 
दिल्ली के बीहड़ चौराहे लिपटे जो लाल बत्तियों में  करतब की अच्छी जगहें हैं   कुछ बच्चे नन्हें नन्हें से  हर रुकी कार के बाजू में  आ आकर ढोल बजाते हैं  हो सर के बल, हाथों से चल  क्या क्या करतब दिखलाते हैं  पावों को सर पे रखते हैं  सर को पावों में लाते हैं  फिर लटक कार के शीशे से  इक रूपये को रिरियाते हैं  इन मासूमो को लगता है  जो लोग कार में बैठे हैं  वे देख के इनको रीझेंगे इन पर निहाल हो जायेंगे  ढेरों पैसे बरसाएंगे  इनको क्या मालूम कारों के  भीतर का अपना कल्चर है  वे इनपर नहीं रीझते हैं  न इनपर ध्यान लगाते हैं  वे ऐसी वैसी बातों में  दिलचस्पी नहीं जताते हैं  उनकी कारों में टीवी है  उसमे मुन्नी के ठुमके हैं वे बस उसमे रस लेते हैं    बत्ती के लाल इशारे पर  उनकी चमकीली कारों के  पहिये आगे बढ़ जाते हैं  कारों के संग कुछ दूर तलक  ये बच्चे दौड़ लगाते हैं  कारों के शीशे नहीं खुले  गाड़ी के पहिये नहीं रुके  दुखी दुखी मुंह लटकाकर  वे लौट के वापस आते हैं  वे फिर से ढोल बजाते हैं  फिर फिर करतब दिखलाते हैं....